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Al-Jumu'a

अल-जुमुआ

शुक्रवार

11 ayahsMedinanहिन्दी

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بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 یُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ وَمَا فِی ٱلۡأَرۡضِ ٱلۡمَلِكِ ٱلۡقُدُّوسِ ٱلۡعَزِیزِ ٱلۡحَكِیمِ

    युसब्बिहु लिल्लाहिह फ़े अस-समावा विश्वास ते वमा फ़े अल-अर्द अल-मलिक अल-कुद्दूस अल-अज़ीज़ अल-हकीमी

    जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा की तस्बीह करती हैं जो (हक़ीक़ी) बादशाह पाक ज़ात ग़ालिब हिकमत वाला है

  2. 2 هُوَ ٱلَّذِی بَعَثَ فِی ٱلۡأُمِّیِّـۧنَ رَسُولࣰا مِّنۡهُمۡ یَتۡلُوا۟ عَلَیۡهِمۡ ءَایَـٰتِهِۦ وَیُزَكِّیهِمۡ وَیُعَلِّمُهُمُ ٱلۡكِتَـٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَإِن كَانُوا۟ مِن قَبۡلُ لَفِی ضَلَـٰلࣲ مُّبِینࣲ

    हुव अल्लाज़ी बाअस फ़े अल-उम्मिय्यिन रसूलन मिन्हुम यतलुवा अलैहिम आयातिहि वा युज़क्कीहिम व युअल्लिमुहुम अल किताब वल-हिक्मत वा-इन कानू मिन क़ब्लु लाफ़ी ज़लालीन

    वही तो जिसने जाहिलों में उन्हीं में का एक रसूल (मोहम्मद) भेजा जो उनके सामने उसकी आयतें पढ़ते और उनको पाक करते और उनको किताब और अक्ल की बातें सिखाते हैं अगरचे इसके पहले तो ये लोग सरीही गुमराही में (पड़े हुए) थे

  3. 3 وَءَاخَرِینَ مِنۡهُمۡ لَمَّا یَلۡحَقُوا۟ بِهِمۡۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِیزُ ٱلۡحَكِیمُ

    वा आख़िरीन मिन्हुम लम्मा यल्हक़ू वहुव अल-अज़ीज़ अल-हकीम

    और उनमें से उन लोगों की तरफ़ (भेजा) जो अभी तक उनसे मुलहिक़ नहीं हुए और वह तो ग़ालिब हिकमत वाला है

  4. 4 ذَ ٰ⁠لِكَ فَضۡلُ ٱللَّهِ یُؤۡتِیهِ مَن یَشَاۤءُۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِیمِ

    ज़ा विश्वास लेका फ़ज़्ल अल्लाह यू'तिहि मैन वल्लाहु ज़ु अल-फ़ज़्ल अल-अज़ीम

    ख़ुदा का फज़ल है जिसको चाहता है अता फरमाता है और ख़ुदा तो बड़े फज़ल (व करम) का मालिक है

  5. 5 مَثَلُ ٱلَّذِینَ حُمِّلُوا۟ ٱلتَّوۡرَىٰةَ ثُمَّ لَمۡ یَحۡمِلُوهَا كَمَثَلِ ٱلۡحِمَارِ یَحۡمِلُ أَسۡفَارَۢاۚ بِئۡسَ مَثَلُ ٱلۡقَوۡمِ ٱلَّذِینَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔایَـٰتِ ٱللَّهِۚ وَٱللَّهُ لَا یَهۡدِی ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّـٰلِمِینَ

    मिसाल अल्लाज़ीना हुम्मिलुआ अत-तौरात सुम्म लम यहमिलुहा कमसलि अल-हिमारी यह्मिलु असफ़ारा बेसा मिसाल अल-कौमी अल्लाज़ीना कज़्ज़ाबू बेआयाति वल्लाहु अल-कौम अज़-ज़़ालिमीन

    जिन लोगों (के सरों) पर तौरेत लदवायी गयी है उन्होने उस (के बार) को न उठाया उनकी मिसाल गधे की सी है जिस पर बड़ी बड़ी किताबें लदी हों जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया उनकी भी क्या बुरी मिसाल है और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंज़िल मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता

  6. 6 قُلۡ یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ هَادُوۤا۟ إِن زَعَمۡتُمۡ أَنَّكُمۡ أَوۡلِیَاۤءُ لِلَّهِ مِن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا۟ ٱلۡمَوۡتَ إِن كُنتُمۡ صَـٰدِقِینَ

    क़ुल या अय्युहा अल्लाज़ीना हादुआ इन ज़ाअम्तुम अन्नाकुम औलिया लिल्लाहिह मिन दूने अन्नास फ़तन्नौ अल मौत इन सादिक़ीन

    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ यहूदियों अगर तुम ये ख्याल करते हो कि तुम ही ख़ुदा के दोस्त हो और लोग नहीं तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो मौत की तमन्ना करो

  7. 7 وَلَا یَتَمَنَّوۡنَهُۥۤ أَبَدَۢا بِمَا قَدَّمَتۡ أَیۡدِیهِمۡۚ وَٱللَّهُ عَلِیمُۢ بِٱلظَّـٰلِمِینَ

    यातमन्नौहु अबदान बिमा क़द्दामत वल्लाहु अलीम बिल्ज़्ज़ालिमीन

    और ये लोग उन आमाल के सबब जो ये पहले कर चुके हैं कभी उसकी आरज़ू न करेंगे और ख़ुदा तो ज़ालिमों को जानता है

  8. 8 قُلۡ إِنَّ ٱلۡمَوۡتَ ٱلَّذِی تَفِرُّونَ مِنۡهُ فَإِنَّهُۥ مُلَـٰقِیكُمۡۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَـٰلِمِ ٱلۡغَیۡبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَیُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

    क़ुल इन्ना अल मौत अल्लाज़ी तफ़िरूना मिन्हु फा-इन्नहु मुलाकिकुम सुम्म तुरद्दुना इला आलिम अल-ग़ैबि वल शहादा फ़युनब्बियुकुम बिमा तामलून

    (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मौत जिससे तुम लोग भागते हो वह तो ज़रूर तुम्हारे सामने आएगी फिर तुम पोशीदा और ज़ाहिर के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ लौटा दिए जाओगे फिर जो कुछ भी तुम करते थे वह तुम्हें बता देगा

  9. 9 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوۤا۟ إِذَا نُودِیَ لِلصَّلَوٰةِ مِن یَوۡمِ ٱلۡجُمُعَةِ فَٱسۡعَوۡا۟ إِلَىٰ ذِكۡرِ ٱللَّهِ وَذَرُوا۟ ٱلۡبَیۡعَۚ ذَ ٰ⁠لِكُمۡ خَیۡرࣱ لَّكُمۡ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना इज़ा नुदिया लिल-सलावाती मिन यौम अल जुमुआ फसओ इला ज़िक्रि अल्लाह वज़रु अल बय्अ ज़ा विश्वास लेकुम ख़ैर लाकुम इन तअलमून

    ऐ ईमानदारों जब जुमा का दिन नमाज़ (जुमा) के लिए अज़ान दी जाए तो ख़ुदा की याद (नमाज़) की तरफ दौड़ पड़ो और (ख़रीद) व फरोख्त छोड़ दो अगर तुम समझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है

  10. 10 فَإِذَا قُضِیَتِ ٱلصَّلَوٰةُ فَٱنتَشِرُوا۟ فِی ٱلۡأَرۡضِ وَٱبۡتَغُوا۟ مِن فَضۡلِ ٱللَّهِ وَٱذۡكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِیرࣰا لَّعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ

    फ़ैज़ा कुज़ियत अस-सलात फ़ंतशिरु फ़े अल-अर्द वबतेग़ु मिन फ़ज़्लि अल्लाह वज़्कुरू अल्लाह लअल्लकुम तुफ़्लिहून

    फिर जब नमाज़ हो चुके तो ज़मीन में (जहाँ चाहो) जाओ और ख़ुदा के फज़ल (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और ख़ुदा को बहुत याद करते रहो ताकि तुम दिली मुरादें पाओ

  11. 11 وَإِذَا رَأَوۡا۟ تِجَـٰرَةً أَوۡ لَهۡوًا ٱنفَضُّوۤا۟ إِلَیۡهَا وَتَرَكُوكَ قَاۤىِٕمࣰاۚ قُلۡ مَا عِندَ ٱللَّهِ خَیۡرࣱ مِّنَ ٱللَّهۡوِ وَمِنَ ٱلتِّجَـٰرَةِۚ وَٱللَّهُ خَیۡرُ ٱلرَّ ٰ⁠زِقِینَ

    वा इज़ा रआ तेजारतन औ लहवाँ इनफ़ज़्ज़ू इलायहा वतारुक क़ाइम क़ुल एंदा अल्लाह ख़ैर मिन अल्लाहु वोमेन अत-तिजारह वल्लाहु ख़ैर अर-राह विश्वास ज़क़ीना

    और (उनकी हालत तो ये है कि) जब ये लोग सौदा बिकता या तमाशा होता देखें तो उसकी तरफ टूट पड़े और तुमको खड़ा हुआ छोड़ दें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि जो चीज़ ख़ुदा के यहाँ है वह तमाशे और सौदे से कहीं बेहतर है और ख़ुदा सबसे बेहतर रिज्क़ देने वाला है

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