Goddestination

Al-Hashr

अल-हश्र

एकत्रीकरण

24 ayahsMedinanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ وَمَا فِی ٱلۡأَرۡضِۖ وَهُوَ ٱلۡعَزِیزُ ٱلۡحَكِیمُ

    सब्बाह लिल्लाहिह फ़े अस-समावा विश्वास ते वमा फ़े वहुव अल-अज़ीज़ अल-हकीम

    जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा की तस्बीह करती हैं और वही ग़ालिब हिकमत वाला है

  2. 2 هُوَ ٱلَّذِیۤ أَخۡرَجَ ٱلَّذِینَ كَفَرُوا۟ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَـٰبِ مِن دِیَـٰرِهِمۡ لِأَوَّلِ ٱلۡحَشۡرِۚ مَا ظَنَنتُمۡ أَن یَخۡرُجُوا۟ۖ وَظَنُّوۤا۟ أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمۡ حُصُونُهُم مِّنَ ٱللَّهِ فَأَتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِنۡ حَیۡثُ لَمۡ یَحۡتَسِبُوا۟ۖ وَقَذَفَ فِی قُلُوبِهِمُ ٱلرُّعۡبَۚ یُخۡرِبُونَ بُیُوتَهُم بِأَیۡدِیهِمۡ وَأَیۡدِی ٱلۡمُؤۡمِنِینَ فَٱعۡتَبِرُوا۟ یَـٰۤأُو۟لِی ٱلۡأَبۡصَـٰرِ

    हुव अख़रज अल्लाज़ीना कफ़रू अह्ल अल किताब मिन दियारिम लेअव्वल अल-हश्र ज़ननतुम अन यख़्रुजू वज़न्नू अन्नहुम मानिअतुम हुसूनुहुम मिन अल्लाह फ़ातहुम अल्लाह हैथु लम यहतसिबु वक़ज़फ़ फ़े क़ुलूबिहिमु अर-रु'ब युख़्रिबून बुयोथेम बेयदिहिम वा यदि अल-मु'मिनीन फ़ातिबिरु या उली अल-अब्सारी

    वही तो है जिसने कुफ्फ़ार अहले किताब (बनी नुजैर) को पहले हश्र (ज़िलाए वतन) में उनके घरों से निकाल बाहर किया (मुसलमानों) तुमको तो ये वहम भी न था कि वह निकल जाएँगे और वह लोग ये समझे हुये थे कि उनके क़िले उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से बचा लेंगे मगर जहाँ से उनको ख्याल भी न था ख़ुदा ने उनको आ लिया और उनके दिलों में (मुसलमानों) को रौब डाल दिया कि वह लोग ख़ुद अपने हाथों से और मोमिनीन के हाथों से अपने घरों को उजाड़ने लगे तो ऐ ऑंख वालों इबरत हासिल करो

  3. 3 وَلَوۡلَاۤ أَن كَتَبَ ٱللَّهُ عَلَیۡهِمُ ٱلۡجَلَاۤءَ لَعَذَّبَهُمۡ فِی ٱلدُّنۡیَاۖ وَلَهُمۡ فِی ٱلۡـَٔاخِرَةِ عَذَابُ ٱلنَّارِ

    वलौला अन कतब अल्लाह अलय्हिमु अल-जलाआ लाअज़ाबहुम फ़े वलहुम फ़े अल-आख़िरति अज़ाबु अन-नार

    और ख़ुदा ने उनकी किसमत में ज़िला वतनी न लिखा होता तो उन पर दुनिया में भी (दूसरी तरह) अज़ाब करता और आख़ेरत में तो उन पर जहन्नुम का अज़ाब है ही

  4. 4 ذَ ٰ⁠لِكَ بِأَنَّهُمۡ شَاۤقُّوا۟ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۖ وَمَن یُشَاۤقِّ ٱللَّهَ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِیدُ ٱلۡعِقَابِ

    ज़ा विश्वास लेका बे-अन-नाहुम शाक़्क़ू अल्लाह वमन योशाक् अल्लाह फ़ाइन्ना अल्लाह शदीद अल-इक़ाब

    ये इसलिए कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त की और जिसने ख़ुदा की मुख़ालेफ़त की तो (याद रहे कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब देने वाला है

  5. 5 مَا قَطَعۡتُم مِّن لِّینَةٍ أَوۡ تَرَكۡتُمُوهَا قَاۤىِٕمَةً عَلَىٰۤ أُصُولِهَا فَبِإِذۡنِ ٱللَّهِ وَلِیُخۡزِیَ ٱلۡفَـٰسِقِینَ

    क़तअतुम मिन लीना औ तर्क्तुमुहा काइमा उसूलिहा फ़बिइज़्नि अल्लाह वलीयुख़्ज़िया अल-फ़ासिक़ीन

    (मोमिनों) खजूर का दरख्त जो तुमने काट डाला या जूँ का तँ से उनकी जड़ों पर खड़ा रहने दिया तो ख़ुदा ही के हुक्म से और मतलब ये था कि वह नाफरमानों को रूसवा करे

  6. 6 وَمَاۤ أَفَاۤءَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ مِنۡهُمۡ فَمَاۤ أَوۡجَفۡتُمۡ عَلَیۡهِ مِنۡ خَیۡلࣲ وَلَا رِكَابࣲ وَلَـٰكِنَّ ٱللَّهَ یُسَلِّطُ رُسُلَهُۥ عَلَىٰ مَن یَشَاۤءُۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَیۡءࣲ قَدِیرࣱ

    अफा अल्लाह अला रसूलिहि मिन्हुम औजफ़्तुम अलय्हि ख़य्ल रिकाब वलाकिन अल्लाह युसल्लितु रसूलुहु अला मैन वल्लाहु अला कुल्लि शै क़दीर

    (तो) जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को उन लोगों से बे लड़े दिलवा दिया उसमें तुम्हार हक़ नहीं क्योंकि तुमने उसके लिए कुछ दौड़ धूप तो की ही नहीं, न घोड़ों से न ऊँटों से, मगर ख़ुदा अपने पैग़म्बरों को जिस पर चाहता है ग़लबा अता फरमाता है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

  7. 7 مَّاۤ أَفَاۤءَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡقُرَىٰ فَلِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِی ٱلۡقُرۡبَىٰ وَٱلۡیَتَـٰمَىٰ وَٱلۡمَسَـٰكِینِ وَٱبۡنِ ٱلسَّبِیلِ كَیۡ لَا یَكُونَ دُولَةَۢ بَیۡنَ ٱلۡأَغۡنِیَاۤءِ مِنكُمۡۚ وَمَاۤ ءَاتَىٰكُمُ ٱلرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَىٰكُمۡ عَنۡهُ فَٱنتَهُوا۟ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِیدُ ٱلۡعِقَابِ

    अफा अल्लाह अला रसूलिहि अह्ल अल-कुरा फा लिल्लाहि वलिर्रसूलि वलेज़ी अल कुरबा वल यतामा व अल-मसाकीन वब्नि अस-सबील कय याकूना दुलास बयना अल-अग़्नी-या अतियाकुम अर-रसूलु फ़ख़ुज़ुहु वमा नहियाकुम अन्हु फ़ान्थुवा वत्तक़ू इन्ना अल्लाह शदीद अल-इक़ाब

    तो जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को देहात वालों से बे लड़े दिलवाया है वह ख़ास ख़ुदा और उसके रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और परदेसियों का है ताकि जो लोग तुममें से दौलतमन्द हैं हिर फिर कर दौलत उन्हीं में न रहे, हाँ जो तुमको रसूल दें दें वह ले लिया करो और जिससे मना करें उससे बाज़ रहो और ख़ुदा से डरते रहो बेशक ख़ुदा सख्त अज़ाब देने वाला है

  8. 8 لِلۡفُقَرَاۤءِ ٱلۡمُهَـٰجِرِینَ ٱلَّذِینَ أُخۡرِجُوا۟ مِن دِیَـٰرِهِمۡ وَأَمۡوَ ٰ⁠لِهِمۡ یَبۡتَغُونَ فَضۡلࣰا مِّنَ ٱللَّهِ وَرِضۡوَ ٰ⁠نࣰا وَیَنصُرُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۤۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ هُمُ ٱلصَّـٰدِقُونَ

    लिल-फुकरा-इ अल-मुहाजिरीन अल्लाज़ीना उख़्रिजू मिन दियारिम वअम्व विश्वास लेहिम यब्तगून फ़ज़्लान मिन अल्लाह वरेज़ु विश्वास ना वा यंसुरूना अल्लाह उलाइक हम अस-सादिक़ून

    (इस माल में) उन मुफलिस मुहाजिरों का हिस्सा भी है जो अपने घरों से और मालों से निकाले (और अलग किए) गए (और) ख़ुदा के फ़ज़ल व ख़ुशनूदी के तलबगार हैं और ख़ुदा की और उसके रसूल की मदद करते हैं यही लोग सच्चे ईमानदार हैं और (उनका भी हिस्सा है)

  9. 9 وَٱلَّذِینَ تَبَوَّءُو ٱلدَّارَ وَٱلۡإِیمَـٰنَ مِن قَبۡلِهِمۡ یُحِبُّونَ مَنۡ هَاجَرَ إِلَیۡهِمۡ وَلَا یَجِدُونَ فِی صُدُورِهِمۡ حَاجَةࣰ مِّمَّاۤ أُوتُوا۟ وَیُؤۡثِرُونَ عَلَىٰۤ أَنفُسِهِمۡ وَلَوۡ كَانَ بِهِمۡ خَصَاصَةࣱۚ وَمَن یُوقَ شُحَّ نَفۡسِهِۦ فَأُو۟لَـٰۤىِٕكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ

    वल्लाज़ीना तबाउउ अद-दार वल ईमान मिन क़िब्लिहिम युहिबुना हाजिरा यजदोन फ़े सुदुरिहिम हाजात उतुआ वयूसीरून अनफुसिहिम वलाउ काना बेहिम ख़सासतुन वमन योक शुह नफ़्सिहि फ़ौलैक हम अल-मुफ़्लिहून

    जो लोग मोहाजेरीन से पहले (हिजरत के) घर (मदीना) में मुक़ीम हैं और ईमान में (मुसतक़िल) रहे और जो लोग हिजरत करके उनके पास आए उनसे मोहब्बत करते हैं और जो कुछ उनको मिला उसके लिए अपने दिलों में कुछ ग़रज़ नहीं पाते और अगरचे अपने ऊपर तंगी ही क्यों न हो दूसरों को अपने नफ्स पर तरजीह देते हैं और जो शख़्श अपने नफ्स की हिर्स से बचा लिया गया तो ऐसे ही लोग अपनी दिली मुरादें पाएँगे

  10. 10 وَٱلَّذِینَ جَاۤءُو مِنۢ بَعۡدِهِمۡ یَقُولُونَ رَبَّنَا ٱغۡفِرۡ لَنَا وَلِإِخۡوَ ٰ⁠نِنَا ٱلَّذِینَ سَبَقُونَا بِٱلۡإِیمَـٰنِ وَلَا تَجۡعَلۡ فِی قُلُوبِنَا غِلࣰّا لِّلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ رَبَّنَاۤ إِنَّكَ رَءُوفࣱ رَّحِیمٌ

    वल्लाज़ीना जाआउ बादिहिम याक़ुलून इग़फ़िर लना वलीख्वा विश्वास नेना अल्लाज़ीना सबक़ूना बिल ईमानी तजअल फ़े क़ुलूबिना ग़िल्लन लिल्लाज़ीन अमेनुआ रब्बना इन्नका रऊफ़ रहीमुन

    और उनका भी हिस्सा है और जो लोग उन (मोहाजेरीन) के बाद आए (और) दुआ करते हैं कि परवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना न आने दे परवरदिगार बेशक तू बड़ा शफीक़ निहायत रहम वाला है

  11. 11 ۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِینَ نَافَقُوا۟ یَقُولُونَ لِإِخۡوَ ٰ⁠نِهِمُ ٱلَّذِینَ كَفَرُوا۟ مِنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَـٰبِ لَىِٕنۡ أُخۡرِجۡتُمۡ لَنَخۡرُجَنَّ مَعَكُمۡ وَلَا نُطِیعُ فِیكُمۡ أَحَدًا أَبَدࣰا وَإِن قُوتِلۡتُمۡ لَنَنصُرَنَّكُمۡ وَٱللَّهُ یَشۡهَدُ إِنَّهُمۡ لَكَـٰذِبُونَ

    अलम तारा इला अल्लाज़ीना नाफ़िक़ुआ याक़ुलून लेइह्वा विश्वास नेहमु अल्लाज़ीना कफ़रू अह्ल अल किताब उख्रिज्तुम लेनख़्रुजन माअकुम नुतिउ फ़ैकुम अहद वा-इन कूतिल्तुम लाननुसुरन्नाकुम वल्लाहु यश्हदु इन्नाहुम लकाज़िबून

    क्या तुमने उन मुनाफ़िकों की हालत पर नज़र नहीं की जो अपने काफ़िर भाइयों अहले किताब से कहा करते हैं कि अगर कहीं तुम (घरों से) निकाले गए तो यक़ीन जानों कि हम भी तुम्हारे साथ (ज़रूर) निकल खड़े होंगे और तुम्हारे बारे में कभी किसी की इताअत न करेंगे और अगर तुमसे लड़ाई होगी तो ज़रूर तुम्हारी मदद करेंगे, मगर ख़ुदा बयान किए देता है कि ये लोग यक़ीनन झूठे हैं

  12. 12 لَىِٕنۡ أُخۡرِجُوا۟ لَا یَخۡرُجُونَ مَعَهُمۡ وَلَىِٕن قُوتِلُوا۟ لَا یَنصُرُونَهُمۡ وَلَىِٕن نَّصَرُوهُمۡ لَیُوَلُّنَّ ٱلۡأَدۡبَـٰرَ ثُمَّ لَا یُنصَرُونَ

    उख़्रिजू यख़रुजून माअहुम वलाइन क़ुतिलुआ यान्सुरूनहुम वलाइन नस्रुहुम लयुल्लुन्न अल-अदबार सुम्म युन्सारून

    अगर कुफ्फ़ार निकाले भी जाएँ तो ये मुनाफेक़ीन उनके साथ न निकलेंगे और अगर उनसे लड़ाई हुई तो उनकी मदद भी न करेंगे और यक़ीनन करेंगे भी तो पीठ फेर कर भाग जाएँगे

  13. 13 لَأَنتُمۡ أَشَدُّ رَهۡبَةࣰ فِی صُدُورِهِم مِّنَ ٱللَّهِۚ ذَ ٰ⁠لِكَ بِأَنَّهُمۡ قَوۡمࣱ لَّا یَفۡقَهُونَ

    लअंतुम अशद्दु रहबतान फ़े मिन ज़ा विश्वास लेका बे-अन-नाहुम क़ौम ला यफ़क़हूना

    फिर उनको कहीं से कुमक भी न मिलेगी (मोमिनों) तुम्हारी हैबत उनके दिलों में ख़ुदा से भी बढ़कर है, ये इस वजह से कि ये लोग समझ नहीं रखते

  14. 14 لَا یُقَـٰتِلُونَكُمۡ جَمِیعًا إِلَّا فِی قُرࣰى مُّحَصَّنَةٍ أَوۡ مِن وَرَاۤءِ جُدُرِۭۚ بَأۡسُهُم بَیۡنَهُمۡ شَدِیدࣱۚ تَحۡسَبُهُمۡ جَمِیعࣰا وَقُلُوبُهُمۡ شَتَّىٰۚ ذَ ٰ⁠لِكَ بِأَنَّهُمۡ قَوۡمࣱ لَّا یَعۡقِلُونَ

    युक़ातिलूनकुम जमिअन इल्ला फ़े कुरान मुहस्सना औ मिन वेरा जुदुरि बसुहुम बयनहुम शदीदुन तह्सबुहुम जमिअन वा क़ुलूबुहुम शत्ता ज़ा विश्वास लेका बे-अन-नाहुम क़ौम ला याक़िलून

    ये सब के सब मिलकर भी तुमसे नहीं लड़ सकते, मगर हर तरफ से महफूज़ बस्तियों में या (शहर पनाह की) दीवारों की आड़ में इनकी आपस में तो बड़ी धाक है कि तुम ख्याल करोगे कि सब के सब (एक जान) हैं मगर उनके दिल एक दूसरे से फटे हुए हैं ये इस वजह से कि ये लोग बेअक्ल हैं

  15. 15 كَمَثَلِ ٱلَّذِینَ مِن قَبۡلِهِمۡ قَرِیبࣰاۖ ذَاقُوا۟ وَبَالَ أَمۡرِهِمۡ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِیمࣱ

    कमसलि अल्लाज़ीना मिन क़िब्लिहिम ज़ाकू वबाल अम्रिहिम वलहुम अज़ाब अलीम

    उनका हाल उन लोगों का सा है जो उनसे कुछ ही पेशतर अपने कामों की सज़ा का मज़ा चख चुके हैं और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है

  16. 16 كَمَثَلِ ٱلشَّیۡطَـٰنِ إِذۡ قَالَ لِلۡإِنسَـٰنِ ٱكۡفُرۡ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ إِنِّی بَرِیۤءࣱ مِّنكَ إِنِّیۤ أَخَافُ ٱللَّهَ رَبَّ ٱلۡعَـٰلَمِینَ

    कमसलि अश-शैतान इज़् क़ाला लिल इन्सान एकफुर फ़लम्मा कफ़र क़ाला इन्नी बरी मिन्क अखाफु अल्लाह रब्ब अल-आलमीन

    (मुनाफ़िकों) की मिसाल शैतान की सी है कि इन्सान से कहता रहा कि काफ़िर हो जाओ, फिर जब वह काफ़िर हो गया तो कहने लगा मैं तुमसे बेज़ार हूँ मैं सारे जहाँ के परवरदिगार से डरता हूँ

  17. 17 فَكَانَ عَـٰقِبَتَهُمَاۤ أَنَّهُمَا فِی ٱلنَّارِ خَـٰلِدَیۡنِ فِیهَاۚ وَذَ ٰ⁠لِكَ جَزَ ٰ⁠ۤؤُا۟ ٱلظَّـٰلِمِینَ

    फ़काना आकिबतहुमा अन्नहुमा फ़े अन-नार ख़ालिदाय्न वज़ा विश्वास लेका जज़ा विश्वास अज़-ज़़ालिमीन

    तो दोनों का नतीजा ये हुआ कि दोनों दोज़ख़ में (डाले) जाएँगे और उसमें हमेशा रहेंगे और यही तमाम ज़ालिमों की सज़ा है

  18. 18 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلۡتَنظُرۡ نَفۡسࣱ مَّا قَدَّمَتۡ لِغَدࣲۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِیرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ

    या अय्युहा अल्लाज़ीना अमेनुआ इत्तकुआ अल्लाह वल्तंज़ुर मा क़द्दामत लेगद वत्तक़ू इन्ना अल्लाह ख़बीर बिमा तामलून

    ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो, और हर शख़्श को ग़ौर करना चाहिए कि कल क़यामत के वास्ते उसने पहले से क्या भेजा है और ख़ुदा ही से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है

  19. 19 وَلَا تَكُونُوا۟ كَٱلَّذِینَ نَسُوا۟ ٱللَّهَ فَأَنسَىٰهُمۡ أَنفُسَهُمۡۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ هُمُ ٱلۡفَـٰسِقُونَ

    ते कोउनुआ कल्लाज़ीना नसुआ अल्लाह फ़ा अंसाहुम अनफुसाहुम उलाइक हम अल-फ़ासिक़ून

    और उन लोगों के जैसे न हो जाओ जो ख़ुदा को भुला बैठे तो ख़ुदा ने उन्हें ऐसा कर दिया कि वह अपने आपको भूल गए यही लोग तो बद किरदार हैं

  20. 20 لَا یَسۡتَوِیۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلنَّارِ وَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡجَنَّةِۚ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡجَنَّةِ هُمُ ٱلۡفَاۤىِٕزُونَ

    यास्तविया असहाबु अन-नार वा अशाब असहाबु अल जन्नत हम अल-फाइज़ून

    जहन्नुमी और जन्नती किसी तरह बराबर नहीं हो सकते जन्नती लोग ही तो कामयाबी हासिल करने वाले हैं

  21. 21 لَوۡ أَنزَلۡنَا هَـٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ عَلَىٰ جَبَلࣲ لَّرَأَیۡتَهُۥ خَـٰشِعࣰا مُّتَصَدِّعࣰا مِّنۡ خَشۡیَةِ ٱللَّهِۚ وَتِلۡكَ ٱلۡأَمۡثَـٰلُ نَضۡرِبُهَا لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ یَتَفَكَّرُونَ

    लौ हाज़ा कुरान अला जबल लराइयताहु ख़ाशिया मुतसद्दियाँ ख़श्यति वतिल्क अल-अमसालु नज़्रिबुहा लिल-नास ला'अल्लाहुम यतफक्करून

    अगर हम इस क़ुरान को किसी पहाड़ पर (भी) नाज़िल करते तो तुम उसको देखते कि ख़ुदा के डर से झुका और फटा जाता है ये मिसालें हम लोगों (के समझाने) के लिए बयान करते हैं ताकि वह ग़ौर करें

  22. 22 هُوَ ٱللَّهُ ٱلَّذِی لَاۤ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَۖ عَـٰلِمُ ٱلۡغَیۡبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِۖ هُوَ ٱلرَّحۡمَـٰنُ ٱلرَّحِیمُ

    हुव अल्लाह अल्लाज़ी ला इलाह इल्ला आलिम अल-ग़ैबि हुव अर-रहमान अर-रहीम

    वही ख़ुदा है जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला वही बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है

  23. 23 هُوَ ٱللَّهُ ٱلَّذِی لَاۤ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلۡمَلِكُ ٱلۡقُدُّوسُ ٱلسَّلَـٰمُ ٱلۡمُؤۡمِنُ ٱلۡمُهَیۡمِنُ ٱلۡعَزِیزُ ٱلۡجَبَّارُ ٱلۡمُتَكَبِّرُۚ سُبۡحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا یُشۡرِكُونَ

    हुव अल्लाह अल्लाज़ी ला इलाह इल्ला हुव अल-मलिक अल-कुद्दूस अस्सलामु अल-मु'मिनु अल-मुहैमिन अल-अज़ीज़ अल-जब्बारु अल-मुतकब्बिरु सुभान अल्लाह अम्मा युश्रिकून

    वही वह ख़ुदा है जिसके सिवा कोई क़ाबिले इबादत नहीं (हक़ीक़ी) बादशाह, पाक ज़ात (हर ऐब से) बरी अमन देने वाला निगेहबान, ग़ालिब ज़बरदस्त बड़ाई वाला ये लोग जिसको (उसका) शरीक ठहराते हैं उससे पाक है

  24. 24 هُوَ ٱللَّهُ ٱلۡخَـٰلِقُ ٱلۡبَارِئُ ٱلۡمُصَوِّرُۖ لَهُ ٱلۡأَسۡمَاۤءُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ یُسَبِّحُ لَهُۥ مَا فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ وَٱلۡأَرۡضِۖ وَهُوَ ٱلۡعَزِیزُ ٱلۡحَكِیمُ

    हुव अल्लाह अल-ख़ालिक़ अल-बारी अल-मुसव्विर लहु अल-अस्मा अल-हुस्ना युसब्बिहु फ़े अस-समावा विश्वास ते वहुव अल-अज़ीज़ अल-हकीम

    वही ख़ुदा (तमाम चीज़ों का ख़ालिक) मुजिद सूरतों का बनाने वाला उसी के अच्छे अच्छे नाम हैं जो चीज़े सारे आसमान व ज़मीन में हैं सब उसी की तसबीह करती हैं, और वही ग़ालिब हिकमत वाला है

This surah in other languages