Al-Mujaadila
अल-मुजादिला
झगड़ालू औरत
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ
बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम
- 1 قَدۡ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوۡلَ ٱلَّتِی تُجَـٰدِلُكَ فِی زَوۡجِهَا وَتَشۡتَكِیۤ إِلَى ٱللَّهِ وَٱللَّهُ یَسۡمَعُ تَحَاوُرَكُمَاۤۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِیعُۢ بَصِیرٌ
क़द समिआ अल्लाह क़ौल अल-लाती तुजादुलुका फ़े ज़ौजिहा वतश्कि इला अल्लाह वल्लाहु यास्माउ तहावुरुकुमा इन्ना अल्लाह समीउ बसीरुन
ऐ रसूल जो औरत (ख़ुला) तुमसे अपने शौहर (उस) के बारे में तुमसे झगड़ती और ख़ुदा से गिले शिकवे करती है ख़ुदा ने उसकी बात सुन ली और ख़ुदा तुम दोनों की ग़ुफ्तगू सुन रहा है बेशक ख़ुदा बड़ा सुनने वाला देखने वाला है
- 2 ٱلَّذِینَ یُظَـٰهِرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَاۤىِٕهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَـٰتِهِمۡۖ إِنۡ أُمَّهَـٰتُهُمۡ إِلَّا ٱلَّـٰۤـِٔی وَلَدۡنَهُمۡۚ وَإِنَّهُمۡ لَیَقُولُونَ مُنكَرࣰا مِّنَ ٱلۡقَوۡلِ وَزُورࣰاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورࣱ
अल्लाज़ीना युज़ाहिरून मिन निसाइयिहिम मा हुन्ना उम्माहातिहिम उम्माहातुहुम इल्ला अल्लाई वलद्नहुम वा इन्नाहुम लैकुलाउन मुन्करन मिन अल क़ौलि वज़ूरन वा इन्ना अल्लाह लाफ़ुव्व ग़फूर
तुम में से जो लोग अपनी बीवियों के साथ ज़हार करते हैं अपनी बीवी को माँ कहते हैं वह कुछ उनकी माएँ नहीं (हो जातीं) उनकी माएँ तो बस वही हैं जो उनको जनती हैं और वह बेशक एक नामाक़ूल और झूठी बात कहते हैं और ख़ुदा बेशक माफ करने वाला और बड़ा बख्शने वाला है
- 3 وَٱلَّذِینَ یُظَـٰهِرُونَ مِن نِّسَاۤىِٕهِمۡ ثُمَّ یَعُودُونَ لِمَا قَالُوا۟ فَتَحۡرِیرُ رَقَبَةࣲ مِّن قَبۡلِ أَن یَتَمَاۤسَّاۚ ذَ ٰلِكُمۡ تُوعَظُونَ بِهِۦۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِیرࣱ
वल्लाज़ीना युज़ाहिरून मिन सुम्म या'उदून लेमा फ़तहरीर रक़बा मिन क़ब्लि अन यतामसा ज़ा विश्वास लेकुम तुआज़ूनून वल्लाहु बिमा तामलून ख़बीर
और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले (कफ्फ़ारे में) एक ग़ुलाम का आज़ाद करना (ज़रूरी) है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो (ख़ुदा) उससे आगाह है
- 4 فَمَن لَّمۡ یَجِدۡ فَصِیَامُ شَهۡرَیۡنِ مُتَتَابِعَیۡنِ مِن قَبۡلِ أَن یَتَمَاۤسَّاۖ فَمَن لَّمۡ یَسۡتَطِعۡ فَإِطۡعَامُ سِتِّینَ مِسۡكِینࣰاۚ ذَ ٰلِكَ لِتُؤۡمِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ وَتِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِۗ وَلِلۡكَـٰفِرِینَ عَذَابٌ أَلِیمٌ
फ़मान लम यजिद फ़सियामु शहरेन मुतातबीयनी मिन क़ब्लि अन फ़मान लम यसतग फे इताम सेत्तीना ज़ा विश्वास लेका ले तौमिनू बिल्लाही वतिल्क हुदूद व लिल काफिरीन अज़ाब अलीमुन
फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के क़ब्ल दो महीने के पै दर पै रोज़े रखें और जिसको इसकी भी क़ुदरत न हो साठ मोहताजों को खाना खिलाना फर्ज़ है ये (हुक्म इसलिए है) ताकि तुम ख़ुदा और उसके रसूल की (पैरवी) तसदीक़ करो और ये ख़ुदा की मुक़र्रर हदें हैं और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
- 5 إِنَّ ٱلَّذِینَ یُحَاۤدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ كُبِتُوا۟ كَمَا كُبِتَ ٱلَّذِینَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ وَقَدۡ أَنزَلۡنَاۤ ءَایَـٰتِۭ بَیِّنَـٰتࣲۚ وَلِلۡكَـٰفِرِینَ عَذَابࣱ مُّهِینࣱ
इन्ना अल्लाज़ीना युहाद्दून अल्लाह वरसुलहु कुबेतुआ कोबेत अल्लाज़ीना मिन वक़िद बय्यिनात व लिल काफिरीन अज़ाब मुहीन
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
- 6 یَوۡمَ یَبۡعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِیعࣰا فَیُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوۤا۟ۚ أَحۡصَىٰهُ ٱللَّهُ وَنَسُوهُۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَیۡءࣲ شَهِیدٌ
यौम यबअथुहुम अल्लाह जमिअन फ़ैयुनब्बिहुम बिमा अमिलुआ अहसाहु अल्लाह वनसुह वल्लाहु अला कुल्लि शै शहीद
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है
- 7 أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ یَعۡلَمُ مَا فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰتِ وَمَا فِی ٱلۡأَرۡضِۖ مَا یَكُونُ مِن نَّجۡوَىٰ ثَلَـٰثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمۡ وَلَا خَمۡسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمۡ وَلَاۤ أَدۡنَىٰ مِن ذَ ٰلِكَ وَلَاۤ أَكۡثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمۡ أَیۡنَ مَا كَانُوا۟ۖ ثُمَّ یُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا۟ یَوۡمَ ٱلۡقِیَـٰمَةِۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَیۡءٍ عَلِیمٌ
अलम तारा अन्ना अल्लाह यालमु फ़े अस-समावा विश्वास ते वमा फ़े याकूनु मिन नज्वा सलासा इल्ला हुव राबिउहुम ख़मसतीन इल्ला हुव सादेसुहुम वला अदना मिन ज़ा विश्वास लेका वला अक्सर इल्ला हुव माअहुम ऐना सुम्म यूनब्बिउहुम बिमा यौम इन्ना अल्लाह बिकुल्लि शै अलीमुन
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
- 8 أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِینَ نُهُوا۟ عَنِ ٱلنَّجۡوَىٰ ثُمَّ یَعُودُونَ لِمَا نُهُوا۟ عَنۡهُ وَیَتَنَـٰجَوۡنَ بِٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَ ٰنِ وَمَعۡصِیَتِ ٱلرَّسُولِۖ وَإِذَا جَاۤءُوكَ حَیَّوۡكَ بِمَا لَمۡ یُحَیِّكَ بِهِ ٱللَّهُ وَیَقُولُونَ فِیۤ أَنفُسِهِمۡ لَوۡلَا یُعَذِّبُنَا ٱللَّهُ بِمَا نَقُولُۚ حَسۡبُهُمۡ جَهَنَّمُ یَصۡلَوۡنَهَاۖ فَبِئۡسَ ٱلۡمَصِیرُ
अलम तारा इला अल्लाज़ीना नुहुआ अने अन-नज्वा सुम्म या'उदून लेमा नुहुआ अन्हु वयेतनाज़ौना बिल इसमी वल-अद्वा विश्वास ने वमासियत अर-रसूल वा इज़ा जाआउका हय्यौक बिमा लम युहय्यिक अल्लाह वयक़ुलून अनफुसिहिम लौला यूअज़्ज़िबुना अल्लाह बिमा नक़ूलु हस्बुहुम फ़बिस अलमासिरु
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है
- 9 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوۤا۟ إِذَا تَنَـٰجَیۡتُمۡ فَلَا تَتَنَـٰجَوۡا۟ بِٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَ ٰنِ وَمَعۡصِیَتِ ٱلرَّسُولِ وَتَنَـٰجَوۡا۟ بِٱلۡبِرِّ وَٱلتَّقۡوَىٰۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِیۤ إِلَیۡهِ تُحۡشَرُونَ
या अय्युहा अल्लाज़ीना इज़ा तनाजयतुम फ़ला ततनाग्वा बिल इसमी वल-अद्वा विश्वास ने वमासियत वेतनज़ौ बिल-बिर्र वत-तक़्वा वत्तक़ू अल्लाह इलायहि तुह्शेरून
ऐ ईमानदारों जब तुम आपस में सरगोशी करो तो गुनाह और ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशी न करो बल्कि नेकीकारी और परहेज़गारी की सरगोशी करो और ख़ुदा से डरते रहो जिसके सामने (एक दिन) जमा किए जाओगे
- 10 إِنَّمَا ٱلنَّجۡوَىٰ مِنَ ٱلشَّیۡطَـٰنِ لِیَحۡزُنَ ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ وَلَیۡسَ بِضَاۤرِّهِمۡ شَیۡـًٔا إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡیَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ
अन-नज्वा मिन अश-शैतान लेयहज़ुना अल्लाज़ीना अमेनुआ वलैस बेज़ाररिहिम शैअन इल्ला बेइज़्नि व अला अल्लाह फ़लियतवक्कल अल-मु'मिनून
(बरी बातों की) सरगोशी तो बस एक शैतानी काम है (और इसलिए करते हैं) ताकि ईमानदारों को उससे रंज पहुँचे हालॉकि ख़ुदा की तरफ से आज़ादी दिए बग़ैर सरगोशी उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकती और मोमिनीन को तो ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए
- 11 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوۤا۟ إِذَا قِیلَ لَكُمۡ تَفَسَّحُوا۟ فِی ٱلۡمَجَـٰلِسِ فَٱفۡسَحُوا۟ یَفۡسَحِ ٱللَّهُ لَكُمۡۖ وَإِذَا قِیلَ ٱنشُزُوا۟ فَٱنشُزُوا۟ یَرۡفَعِ ٱللَّهُ ٱلَّذِینَ ءَامَنُوا۟ مِنكُمۡ وَٱلَّذِینَ أُوتُوا۟ ٱلۡعِلۡمَ دَرَجَـٰتࣲۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِیرࣱ
या अय्युहा अल्लाज़ीना इज़ा क़िला लकुम तफस्सहु फ़े अल-मजालिसि फ़फ़सहु यफ़सह अल्लाह वा इज़ा क़िला इनशुज़ू फ़ानशुज़ू यारफ़ग अल्लाह अल्लाज़ीना अमेनुआ मिन्कुम वल्लाज़ीना उतुआ अल-इल्म दरजात वल्लाहु बिमा तामलून ख़बीर
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कहा जाए कि मजलिस में जगह कुशादा करो वह तो कुशादा कर दिया करो ख़ुदा तुमको कुशादगी अता करेगा और जब तुमसे कहा जाए कि उठ खड़े हो तो उठ खड़े हुआ करो जो लोग तुमसे ईमानदार हैं और जिनको इल्म अता हुआ है ख़ुदा उनके दर्जे बुलन्द करेगा और ख़ुदा तुम्हारे सब कामों से बेख़बर है
- 12 یَـٰۤأَیُّهَا ٱلَّذِینَ ءَامَنُوۤا۟ إِذَا نَـٰجَیۡتُمُ ٱلرَّسُولَ فَقَدِّمُوا۟ بَیۡنَ یَدَیۡ نَجۡوَىٰكُمۡ صَدَقَةࣰۚ ذَ ٰلِكَ خَیۡرࣱ لَّكُمۡ وَأَطۡهَرُۚ فَإِن لَّمۡ تَجِدُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورࣱ رَّحِیمٌ
या अय्युहा अल्लाज़ीना इज़ा नजैतुम अर-रसूल फ़कदिमु बयना यदय नज्वाकुम सदक़ा ज़ा विश्वास लेका ख़ैर लाकुम वा अत्हरु फा-इन लम तजिदुआ फ़ाइन्ना अल्लाह ग़फूर रहीमुन
ऐ ईमानदारों जब पैग़म्बर से कोई बात कान में कहनी चाहो तो कुछ ख़ैरात अपनी सरगोशी से पहले दे दिया करो यही तुम्हारे वास्ते बेहतर और पाकीज़ा बात है पस अगर तुमको इसका मुक़दूर न हो तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
- 13 ءَأَشۡفَقۡتُمۡ أَن تُقَدِّمُوا۟ بَیۡنَ یَدَیۡ نَجۡوَىٰكُمۡ صَدَقَـٰتࣲۚ فَإِذۡ لَمۡ تَفۡعَلُوا۟ وَتَابَ ٱللَّهُ عَلَیۡكُمۡ فَأَقِیمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِیعُوا۟ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ وَٱللَّهُ خَبِیرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ
अश्फकतुम अन तु-कद-दिम-उ बयना यदय नज्वाकुम सदकात फा-इज़ लम तफ़अलू वताब अल्लाह अलैकुम फ़क़ीमू अस-सलात वातू वा-ती-ऊ अल्लाह वल्लाहु ख़बीर बिमा तामलून
(मुसलमानों) क्या तुम इस बात से डर गए कि (रसूल के) कान में बात कहने से पहले ख़ैरात कर लो तो जब तुम लोग (इतना सा काम) न कर सके और ख़ुदा ने तुम्हें माफ़ कर दिया तो पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात देते रहो और ख़ुदा उसके रसूल की इताअत करो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
- 14 ۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِینَ تَوَلَّوۡا۟ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَیۡهِم مَّا هُم مِّنكُمۡ وَلَا مِنۡهُمۡ وَیَحۡلِفُونَ عَلَى ٱلۡكَذِبِ وَهُمۡ یَعۡلَمُونَ
अलम तारा इला अल्लाज़ीना तवल्ला कौमा ग़ज़िब अल्लाह मा मिन्कुम मिन्हुम व यहलिफून अलै अल-कज़िबि वहुम यालमून
क्या तुमने उन लोगों की हालत पर ग़ौर नहीं किया जो उन लोगों से दोस्ती करते हैं जिन पर ख़ुदा ने ग़ज़ब ढाया है तो अब वह न तुम मे हैं और न उनमें ये लोग जानबूझ कर झूठी बातो पर क़समें खाते हैं और वह जानते हैं
- 15 أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمۡ عَذَابࣰا شَدِیدًاۖ إِنَّهُمۡ سَاۤءَ مَا كَانُوا۟ یَعۡمَلُونَ
अअद्दा अल्लाह लाहुम अज़ाबाँ शदीदां इन्नाहुम सा कानू यामलून
ख़ुदा ने उनके लिए सख्त अज़ाब तैयार कर रखा है इसमें शक़ नहीं कि ये लोग जो कुछ करते हैं बहुत ही बुरा है
- 16 ٱتَّخَذُوۤا۟ أَیۡمَـٰنَهُمۡ جُنَّةࣰ فَصَدُّوا۟ عَن سَبِیلِ ٱللَّهِ فَلَهُمۡ عَذَابࣱ مُّهِینࣱ
इत्तख़ाज़ू ऐमानहुम जिन्नात फ़स्द्दू अन सबील अल्लाह फ़लहुम अज़ाब मुहीन
उन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना लिया है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोक दिया तो उनके लिए रूसवा करने वाला अज़ाब है
- 17 لَّن تُغۡنِیَ عَنۡهُمۡ أَمۡوَ ٰلُهُمۡ وَلَاۤ أَوۡلَـٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَیۡـًٔاۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ أَصۡحَـٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِیهَا خَـٰلِدُونَ
लान तुग्निया अन्हुम अम्वा विश्वास लुहुम वला औलादुहुम मिन अल्लाह उलाइक असहाबु हुम फ़िहा ख़ालिदून
ख़ुदा सामने हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएँगे और न उनकी औलाद ही काम आएगी यही लोग जहन्नुमी हैं कि हमेशा उसमें रहेंगे
- 18 یَوۡمَ یَبۡعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِیعࣰا فَیَحۡلِفُونَ لَهُۥ كَمَا یَحۡلِفُونَ لَكُمۡ وَیَحۡسَبُونَ أَنَّهُمۡ عَلَىٰ شَیۡءٍۚ أَلَاۤ إِنَّهُمۡ هُمُ ٱلۡكَـٰذِبُونَ
यौम यबअथुहुम अल्लाह जमिअन फ़येहलिफ़ून यहलिफून लकुम वयहसबून अला अला इन्नाहुम हम अल-काज़िबून
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबार उठा खड़ा करेगा तो ये लोग जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं उसी तरह उसके सामने भी क़समें खाएँगे और ख्याल करते हैं कि वह राहे सवाब पर हैं आगाह रहो ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
- 19 ٱسۡتَحۡوَذَ عَلَیۡهِمُ ٱلشَّیۡطَـٰنُ فَأَنسَىٰهُمۡ ذِكۡرَ ٱللَّهِۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ حِزۡبُ ٱلشَّیۡطَـٰنِۚ أَلَاۤ إِنَّ حِزۡبَ ٱلشَّیۡطَـٰنِ هُمُ ٱلۡخَـٰسِرُونَ
इस्तहूज़ा अलय्हिमु अश-शैतान फ़ा अंसाहुम ज़िक्र उलाइक हिज़्बु अला इन्ना हिज़्ब अश-शैतान हम अल-खासिरून
शैतान ने इन पर क़ाबू पा लिया है और ख़ुदा की याद उनसे भुला दी है ये लोग शैतान के गिरोह है सुन रखो कि शैतान का गिरोह घाटा उठाने वाला है
- 20 إِنَّ ٱلَّذِینَ یُحَاۤدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۤ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ فِی ٱلۡأَذَلِّینَ
इन्ना अल्लाज़ीना युहाद्दून अल्लाह उलाइक फ़े अल-अज़ल्लीन
जो लोग ख़ुदा और उसके रसूल से मुख़ालेफ़त करते हैं वह सब ज़लील लोगों में हैं
- 21 كَتَبَ ٱللَّهُ لَأَغۡلِبَنَّ أَنَا۠ وَرُسُلِیۤۚ إِنَّ ٱللَّهَ قَوِیٌّ عَزِیزࣱ
कतब अल्लाह ला अग़्लिबन्न अना वरुसुलि इन्ना अल्लाह क़विय्युन अज़ीज़
ख़ुदा ने हुक्म नातिक दे दिया है कि मैं और मेरे पैग़म्बर ज़रूर ग़ालिब रहेंगे बेशक ख़ुदा बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
- 22 لَّا تَجِدُ قَوۡمࣰا یُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡیَوۡمِ ٱلۡـَٔاخِرِ یُوَاۤدُّونَ مَنۡ حَاۤدَّ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَوۡ كَانُوۤا۟ ءَابَاۤءَهُمۡ أَوۡ أَبۡنَاۤءَهُمۡ أَوۡ إِخۡوَ ٰنَهُمۡ أَوۡ عَشِیرَتَهُمۡۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ كَتَبَ فِی قُلُوبِهِمُ ٱلۡإِیمَـٰنَ وَأَیَّدَهُم بِرُوحࣲ مِّنۡهُۖ وَیُدۡخِلُهُمۡ جَنَّـٰتࣲ تَجۡرِی مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَـٰرُ خَـٰلِدِینَ فِیهَاۚ رَضِیَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُوا۟ عَنۡهُۚ أُو۟لَـٰۤىِٕكَ حِزۡبُ ٱللَّهِۚ أَلَاۤ إِنَّ حِزۡبَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ
ला तुम पाओगे क़ौमन यूमीनून बिल्लाही वल्यौमि युआद्दुना हाद्द अल्लाह वरसुलहु वलाउ अबाआहुम औ अबनाआहुम औ इख्वा विश्वास नाहुम औ अशीरतुहुम उलाइक कतब फ़े क़ुलूबिहिमु अल-ईमान वअय्यदहुम बिरुह मिन्हु वयुधुल्हुम तजरी मिन तहतिहा अल-अन्हारु ख़ालिदीन रिज़िया अल्लाह अन्हुम वराज़ू उलाइक हिज़्बु अला इन्ना हिज़्ब अल्लाह हम अल-मुफ़्लिहून
जो लोग ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं तुम उनको ख़ुदा और उसके रसूल के दुश्मनों से दोस्ती करते हुए न देखोगे अगरचे वह उनके बाप या बेटे या भाई या ख़ानदान ही के लोग (क्यों न हों) यही वह लोग हैं जिनके दिलों में ख़ुदा ने ईमान को साबित कर दिया है और ख़ास अपने नूर से उनकी ताईद की है और उनको (बेहिश्त में) उन (हरे भरे) बाग़ों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरे जारी है (और वह) हमेश उसमें रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश यही ख़ुदा का गिरोह है सुन रखो कि ख़ुदा के गिरोग के लोग दिली मुरादें पाएँगे
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