Al-Waaqia
अल-वाक़िआ
घटना
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ
बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम
- 1 إِذَا وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ
इज़ा वक़ति अल-वाक़िआह
जब क़यामत बरपा होगी और उसके वाक़िया होने में ज़रा झूट नहीं
- 2 لَیۡسَ لِوَقۡعَتِهَا كَاذِبَةٌ
लैस लेवा'अतिहा काज़िबा
(उस वक्त लोगों में फ़र्क ज़ाहिर होगा)
- 3 خَافِضَةࣱ رَّافِعَةٌ
ख़ाफ़िज़ा राफ़िया
कि किसी को पस्त करेगी किसी को बुलन्द
- 4 إِذَا رُجَّتِ ٱلۡأَرۡضُ رَجࣰّا
इज़ा रुज्जत अल-अर्द रज्जन
जब ज़मीन बड़े ज़ोरों में हिलने लगेगी
- 5 وَبُسَّتِ ٱلۡجِبَالُ بَسࣰّا
वबुस्त अल-जिबालु बस्सन
और पहाड़ (टकरा कर) बिल्कुल चूर चूर हो जाएँगे
- 6 فَكَانَتۡ هَبَاۤءࣰ مُّنۢبَثࣰّا
फ़कानत हबा मुन्बथा
फिर ज़र्रे बन कर उड़ने लगेंगे
- 7 وَكُنتُمۡ أَزۡوَ ٰجࣰا ثَلَـٰثَةࣰ
वा कुंतुम अज़्वा विश्वास जा सलासा
और तुम लोग तीन किस्म हो जाओगे
- 8 فَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَیۡمَنَةِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَیۡمَنَةِ
फ़ाअसहाब अल-मैमना मा असहाबु अल-मैमना
तो दाहिने हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (वाह) दाहिने हाथ वाले क्या (चैन में) हैं
- 9 وَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ
वा अशाब अल-मशअमति मा असहाबु अल-मशअमति
और बाएं हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (अफ़सोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
- 10 وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلسَّـٰبِقُونَ
वल्साबिकून अस-साबिक़ून
और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं (वाह क्या कहना) वह आगे ही बढ़ने वाले थे
- 11 أُو۟لَـٰۤىِٕكَ ٱلۡمُقَرَّبُونَ
उलाइक अल-मुक़र्रबून
यही लोग (ख़ुदा के) मुक़र्रिब हैं
- 12 فِی جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِیمِ
फ़े जन्नत अन-नईम
आराम व आसाइश के बाग़ों में बहुत से
- 13 ثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِینَ
थुल्ला मिन अल-अव्वालीन
तो अगले लोगों में से होंगे
- 14 وَقَلِیلࣱ مِّنَ ٱلۡـَٔاخِرِینَ
वकील मिन अल-आख़िरीन
और कुछ थोडे से पिछले लोगों में से मोती
- 15 عَلَىٰ سُرُرࣲ مَّوۡضُونَةࣲ
अला मौज़ूना
और याक़ूत से जड़े हुए सोने के तारों से बने हुए
- 16 مُّتَّكِـِٔینَ عَلَیۡهَا مُتَقَـٰبِلِینَ
मुत्तकीना अलय्हा मुतक़ाबिलीना
तख्ते पर एक दूसरे के सामने तकिए लगाए (बैठे) होंगे
- 17 یَطُوفُ عَلَیۡهِمۡ وِلۡدَ ٰنࣱ مُّخَلَّدُونَ
यतूफ़ु अलैहिम वेल्द विश्वास नाँ मुखल्लदून
नौजवान लड़के जो (बेहिश्त में) हमेशा (लड़के ही बने) रहेंगे
- 18 بِأَكۡوَابࣲ وَأَبَارِیقَ وَكَأۡسࣲ مِّن مَّعِینࣲ
बेअक्वाबिन वा अबारीक वकस मिन मईन
(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे
- 19 لَّا یُصَدَّعُونَ عَنۡهَا وَلَا یُنزِفُونَ
ला यूसद्दाऊन अन्हा यून्ज़ेफ़ून
जिसके (पीने) से न तो उनको (ख़ुमार से) दर्दसर होगा और न वह बदहवास मदहोश होंगे
- 20 وَفَـٰكِهَةࣲ مِّمَّا یَتَخَیَّرُونَ
मिम्मा यतखैय्यारून
और जिस क़िस्म के मेवे पसन्द करें
- 21 وَلَحۡمِ طَیۡرࣲ مِّمَّا یَشۡتَهُونَ
वेलह्मि तैर मिम्मा यश्तहून
और जिस क़िस्म के परिन्दे का गोश्त उनका जी चाहे (सब मौजूद है)
- 22 وَحُورٌ عِینࣱ
वहूर ऐन
और बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरें
- 23 كَأَمۡثَـٰلِ ٱللُّؤۡلُوِٕ ٱلۡمَكۡنُونِ
का अमसाल अलुलुई अल-मक्नून
जैसे एहतेयात से रखे हुए मोती
- 24 جَزَاۤءَۢ بِمَا كَانُوا۟ یَعۡمَلُونَ
जज़ा बिमा कानू यामलून
ये बदला है उनके (नेक) आमाल का
- 25 لَا یَسۡمَعُونَ فِیهَا لَغۡوࣰا وَلَا تَأۡثِیمًا
यास्मऊन फ़िहा लग़्वा ता'सीमां
वहाँ न तो बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह की बात
- 26 إِلَّا قِیلࣰا سَلَـٰمࣰا سَلَـٰمࣰا
इल्ला क़िला सलाम सलाम
(फहश) बस उनका कलाम सलाम ही सलाम होगा
- 27 وَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡیَمِینِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡیَمِینِ
वा अशाब अल-यमीन मा असहाबु अल-यमीन
और दाहिने हाथ वाले (वाह) दाहिने हाथ वालों का क्या कहना है
- 28 فِی سِدۡرࣲ مَّخۡضُودࣲ
फ़े सेदर मख़्ज़ुद
बे काँटे की बेरो और लदे गुथे हुए
- 29 وَطَلۡحࣲ مَّنضُودࣲ
वतल्ह मंज़ूद
केलों और लम्बी लम्बी छाँव
- 30 وَظِلࣲّ مَّمۡدُودࣲ
वज़िल ममदूद
और झरनो के पानी
- 31 وَمَاۤءࣲ مَّسۡكُوبࣲ
वामा मस्कूब
और अनारों
- 32 وَفَـٰكِهَةࣲ كَثِیرَةࣲ
कसीरा
मेवो में होंगें
- 33 لَّا مَقۡطُوعَةࣲ وَلَا مَمۡنُوعَةࣲ
ला मकतुआ मामनुआ
जो न कभी खत्म होंगे और न उनकी कोई रोक टोक
- 34 وَفُرُشࣲ مَّرۡفُوعَةٍ
वफ़ुरुश मारफूआतिन
और ऊँचे ऊँचे (नरम गद्दो के) फ़र्शों में (मज़े करते) होंगे
- 35 إِنَّاۤ أَنشَأۡنَـٰهُنَّ إِنشَاۤءࣰ
इन्ना अंशअनाहुन्ना इन्शा
(उनको) वह हूरें मिलेंगी जिसको हमने नित नया पैदा किया है
- 36 فَجَعَلۡنَـٰهُنَّ أَبۡكَارًا
फजअलनाहुन्ना अबकारन
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ प्यारी प्यारी हमजोलियाँ बनाया
- 37 عُرُبًا أَتۡرَابࣰا
उरुबान अतराबन
(ये सब सामान)
- 38 لِّأَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ
लिआसहाबि अल-यमीन
दाहिने हाथ (में नामए आमाल लेने) वालों के वास्ते है
- 39 ثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِینَ
थुल्ला मिन अल-अव्वालीन
(इनमें) बहुत से तो अगले लोगों में से
- 40 وَثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡـَٔاخِرِینَ
वसुल्ला मिन अल-आख़िरीन
और बहुत से पिछले लोगों में से
- 41 وَأَصۡحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ
वा अशाब अश-शिमाली मा असहाबु अश-शिमाली
और बाएं हाथ (में नामए आमाल लेने) वाले (अफसोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
- 42 فِی سَمُومࣲ وَحَمِیمࣲ
फ़े समूम वहीम
(दोज़ख़ की) लौ और खौलते हुए पानी
- 43 وَظِلࣲّ مِّن یَحۡمُومࣲ
वज़िल मिन यहमुम
और काले सियाह धुएँ के साये में होंगे
- 44 لَّا بَارِدࣲ وَلَا كَرِیمٍ
ला बारिद करीम
जो न ठन्डा और न ख़ुश आइन्द
- 45 إِنَّهُمۡ كَانُوا۟ قَبۡلَ ذَ ٰلِكَ مُتۡرَفِینَ
इन्नाहुम कानू क़िबला ज़ा विश्वास लेका मुतरफ़िना
ये लोग इससे पहले (दुनिया में) ख़ूब ऐश उड़ा चुके थे
- 46 وَكَانُوا۟ یُصِرُّونَ عَلَى ٱلۡحِنثِ ٱلۡعَظِیمِ
वा कानू युसर्रुन अलै अल-हिन्सि अल-अज़ीम
और बड़े गुनाह (शिर्क) पर अड़े रहते थे
- 47 وَكَانُوا۟ یَقُولُونَ أَىِٕذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابࣰا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ
वा कानू याक़ुलून अय्यिदा मेतना वा कुन्ना तुराबन वैज़मा अ इन्ना लम्बेउथून
और कहा करते थे कि भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी और हडिडयाँ (ही हडिडयाँ) रह जाएँगे
- 48 أَوَءَابَاۤؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ
अवाबाऊना अल-अव्वलून
तो क्या हमें या हमारे अगले बाप दादाओं को फिर उठना है
- 49 قُلۡ إِنَّ ٱلۡأَوَّلِینَ وَٱلۡـَٔاخِرِینَ
क़ुल इन्ना अल-अव्वालीन वल आख़िरीन
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगले और पिछले
- 50 لَمَجۡمُوعُونَ إِلَىٰ مِیقَـٰتِ یَوۡمࣲ مَّعۡلُومࣲ
लमज्मुऊन इला मेयकात यौम मालूम
सब के सब रोजे मुअय्यन की मियाद पर ज़रूर इकट्ठे किए जाएँगे
- 51 ثُمَّ إِنَّكُمۡ أَیُّهَا ٱلضَّاۤلُّونَ ٱلۡمُكَذِّبُونَ
सुम्म अय्युहा अज़्-ज़ाल्लून अल-मुकज़्ज़िबून
फिर तुमको बेशक ऐ गुमराहों झुठलाने वालों
- 52 لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرࣲ مِّن زَقُّومࣲ
लिएकिलूना मिन शजर मिन ज़क़्क़ूम
यक़ीनन (जहन्नुम में) थोहड़ के दरख्तों में से खाना होगा
- 53 فَمَالِـُٔونَ مِنۡهَا ٱلۡبُطُونَ
फामालिउन मिन्हा अल-बुतून
तो तुम लोगों को उसी से (अपना) पेट भरना होगा
- 54 فَشَـٰرِبُونَ عَلَیۡهِ مِنَ ٱلۡحَمِیمِ
फ़शरिबून अलय्हि मिन अल-हमीम
फिर उसके ऊपर खौलता हुआ पानी पीना होगा
- 55 فَشَـٰرِبُونَ شُرۡبَ ٱلۡهِیمِ
फ़शरिबून शुर्ब अल-हीम
और पियोगे भी तो प्यासे ऊँट का सा (डग डगा के) पीना
- 56 هَـٰذَا نُزُلُهُمۡ یَوۡمَ ٱلدِّینِ
हाज़ा नुज़ुलुहुम यौम अद-दीन
क़यामत के दिन यही उनकी मेहमानी होगी
- 57 نَحۡنُ خَلَقۡنَـٰكُمۡ فَلَوۡلَا تُصَدِّقُونَ
नह्नु ख़लक़नाकुम फ़लौला तु-सद्दीकु-ओन
तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है
- 58 أَفَرَءَیۡتُم مَّا تُمۡنُونَ
अफ़राएतुम मा तमनून
फिर तुम लोग (दोबार की) क्यों नहीं तस्दीक़ करते
- 59 ءَأَنتُمۡ تَخۡلُقُونَهُۥۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡخَـٰلِقُونَ
अअन्तुम तख़लूकूनाहू अम नह्नु अल-ख़ालिकून
तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं
- 60 نَحۡنُ قَدَّرۡنَا بَیۡنَكُمُ ٱلۡمَوۡتَ وَمَا نَحۡنُ بِمَسۡبُوقِینَ
नह्नु कदर्ना बयनकुम अल मौत वमा नह्नु बिमस्बुकीन
हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं
- 61 عَلَىٰۤ أَن نُّبَدِّلَ أَمۡثَـٰلَكُمۡ وَنُنشِئَكُمۡ فِی مَا لَا تَعۡلَمُونَ
अन नुबद्दिल अम्सालकुम वेनुन्शिएकुम फ़े तअलमून
कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते
- 62 وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُولَىٰ فَلَوۡلَا تَذَكَّرُونَ
व-लक्द अलिम्तुमु अन-नशअत अल-उला फ़लौला तज़क्करून
और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते
- 63 أَفَرَءَیۡتُم مَّا تَحۡرُثُونَ
अफ़राएतुम मा तहरुसून
भला देखो तो कि जो कुछ तुम लोग बोते हो क्या
- 64 ءَأَنتُمۡ تَزۡرَعُونَهُۥۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلزَّ ٰرِعُونَ
अअन्तुम तज़रऊनुहु अम नह्नु अल्झा विश्वास रिउन
तुम लोग उसे उगाते हो या हम उगाते हैं अगर हम चाहते
- 65 لَوۡ نَشَاۤءُ لَجَعَلۡنَـٰهُ حُطَـٰمࣰا فَظَلۡتُمۡ تَفَكَّهُونَ
लौ नेशा लजअल्नाहु फ़ज़लतुम तफक्कुहुन
तो उसे चूर चूर कर देते तो तुम बातें ही बनाते रह जाते
- 66 إِنَّا لَمُغۡرَمُونَ
लमुगरमून
कि (हाए) हम तो (मुफ्त) तावान में फॅसे (नहीं)
- 67 بَلۡ نَحۡنُ مَحۡرُومُونَ
नह्नु माहरूमून
हम तो बदनसीब हैं
- 68 أَفَرَءَیۡتُمُ ٱلۡمَاۤءَ ٱلَّذِی تَشۡرَبُونَ
अफ़राएतुम अल-मा अल्लाज़ी तशरबुना
तो क्या तुमने पानी पर भी नज़र डाली जो (दिन रात) पीते हो
- 69 ءَأَنتُمۡ أَنزَلۡتُمُوهُ مِنَ ٱلۡمُزۡنِ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنزِلُونَ
अअन्तुम अंज़लतुमूहु मिन अल-मुज़्नी अम नह्नु अल-मुन्ज़िलून
क्या उसको बादल से तुमने बरसाया है या हम बरसाते हैं
- 70 لَوۡ نَشَاۤءُ جَعَلۡنَـٰهُ أُجَاجࣰا فَلَوۡلَا تَشۡكُرُونَ
लौ नेशा जाअलनाह उजाज फ़लौला तशकुरून
अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग यक्र क्यों नहीं करते
- 71 أَفَرَءَیۡتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِی تُورُونَ
अफ़राएतुम अन-नार अल-लाती तोरून
तो क्या तुमने आग पर भी ग़ौर किया जिसे तुम लोग लकड़ी से निकालते हो
- 72 ءَأَنتُمۡ أَنشَأۡتُمۡ شَجَرَتَهَاۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنشِـُٔونَ
अअन्तुम अंशातुम शजरताहा अम नह्नु अल-मुन्शिऊन
क्या उसके दरख्त को तुमने पैदा किया या हम पैदा करते हैं
- 73 نَحۡنُ جَعَلۡنَـٰهَا تَذۡكِرَةࣰ وَمَتَـٰعࣰا لِّلۡمُقۡوِینَ
नह्नु जाअलनाहा वमतान लिल मुक़्वीनीन
हमने आग को (जहन्नुम की) याद देहानी और मुसाफिरों के नफे के (वास्ते पैदा किया)
- 74 فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِیمِ
फसब्बिह बिस्मि रब्बिक अल-अज़ीम
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
- 75 ۞ فَلَاۤ أُقۡسِمُ بِمَوَ ٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
उक़्सिमु बिमोव विश्वास क़िए अन-नुजूम
तो मैं तारों के मनाज़िल की क़सम खाता हूँ
- 76 وَإِنَّهُۥ لَقَسَمࣱ لَّوۡ تَعۡلَمُونَ عَظِیمٌ
वा इन्नाहु लाकसमुन लौ तअलमून अज़ीम
और अगर तुम समझो तो ये बड़ी क़सम है
- 77 إِنَّهُۥ لَقُرۡءَانࣱ كَرِیمࣱ
इन्नाहु कुरआन
कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है
- 78 فِی كِتَـٰبࣲ مَّكۡنُونࣲ
फ़े मक्नून
जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है
- 79 لَّا یَمَسُّهُۥۤ إِلَّا ٱلۡمُطَهَّرُونَ
ला यमुस्सुहु इल्ला अल-मुतह्हरून
इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं
- 80 تَنزِیلࣱ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَـٰلَمِینَ
तंज़ील मिन रब्बी अल-आलमीन
सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है
- 81 أَفَبِهَـٰذَا ٱلۡحَدِیثِ أَنتُم مُّدۡهِنُونَ
अ फा बिहाज़ा मुद्हिनून
तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो
- 82 وَتَجۡعَلُونَ رِزۡقَكُمۡ أَنَّكُمۡ تُكَذِّبُونَ
व तज'अलूना रिज़्ककुम अन्नाकुम तुकज़्ज़िबून
और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो
- 83 فَلَوۡلَاۤ إِذَا بَلَغَتِ ٱلۡحُلۡقُومَ
इज़ा बलग़ति अल-हुल्कुम
तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है
- 84 وَأَنتُمۡ حِینَىِٕذࣲ تَنظُرُونَ
और तुम हिनिज़ तंज़ुरून
और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो
- 85 وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَیۡهِ مِنكُمۡ وَلَـٰكِن لَّا تُبۡصِرُونَ
वा नह्नु अकराबु इलायहि मिन्कुम वलाकिन ला तुब्सिरून
और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता
- 86 فَلَوۡلَاۤ إِن كُنتُمۡ غَیۡرَ مَدِینِینَ
इन ग़ैर मदीनिना
तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो
- 87 تَرۡجِعُونَهَاۤ إِن كُنتُمۡ صَـٰدِقِینَ
तर्जिउनाहा इन सादिक़ीन
तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते
- 88 فَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُقَرَّبِینَ
इन काना मिन अल-मुक़र्रबीन
पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है
- 89 فَرَوۡحࣱ وَرَیۡحَانࣱ وَجَنَّتُ نَعِیمࣲ
फ़ारुह वरैहान वा जन्नतु नईम
तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़
- 90 وَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنۡ أَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ
इन काना असहाबि अल-यमीन
और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है
- 91 فَسَلَـٰمࣱ لَّكَ مِنۡ أَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ
फ़सलाम लाका असहाबि अल-यमीन
तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो
- 92 وَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُكَذِّبِینَ ٱلضَّاۤلِّینَ
इन काना मिन अल-मुकज़्ज़िबीन अज़्-ज़ाल्लीन
और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है
- 93 فَنُزُلࣱ مِّنۡ حَمِیمࣲ
फ़ानुज़ुल
तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है
- 94 وَتَصۡلِیَةُ جَحِیمٍ
वा तस्लीयतु जहीम
और जहन्नुम में दाखिल कर देना
- 95 إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلۡیَقِینِ
इन्ना हाज़ा लहुवा हक़्क़ु अल-यक़ीनी
बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है
- 96 فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِیمِ
फसब्बिह बिस्मि रब्बिक अल-अज़ीम
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
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