Goddestination

An-Najm

अन-नज्म

तारा

62 ayahsMeccanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 وَٱلنَّجۡمِ إِذَا هَوَىٰ

    वन-नज्म इज़ा हवा

    तारे की क़सम जब टूटा

  2. 2 مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمۡ وَمَا غَوَىٰ

    ज़ल्ला वमा ग़वा

    कि तुम्हारे रफ़ीक़ (मोहम्मद) न गुमराह हुए और न बहके

  3. 3 وَمَا یَنطِقُ عَنِ ٱلۡهَوَىٰۤ

    वमा यान्तिकु अने

    और वह तो अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश से कुछ भी नहीं कहते

  4. 4 إِنۡ هُوَ إِلَّا وَحۡیࣱ یُوحَىٰ

    हुव इल्ला वही यूहा

    ये तो बस वही है जो भेजी जाती है

  5. 5 عَلَّمَهُۥ شَدِیدُ ٱلۡقُوَىٰ

    शदीद अल-कुवा

    इनको निहायत ताक़तवर (फ़रिश्ते जिबरील) ने तालीम दी है

  6. 6 ذُو مِرَّةࣲ فَٱسۡتَوَىٰ

    ज़ु मेर्रा फ़स्तवा

    जो बड़ा ज़बरदस्त है और जब ये (आसमान के) ऊँचे (मुशरक़ो) किनारे पर था तो वह अपनी (असली सूरत में) सीधा खड़ा हुआ

  7. 7 وَهُوَ بِٱلۡأُفُقِ ٱلۡأَعۡلَىٰ

    वहुव बेलुफुकि अल आ'ला

    फिर करीब हो (और आगे) बढ़ा

  8. 8 ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ

    सुम्म दना फ़तदल्ला

    (फिर जिबरील व मोहम्मद में) दो कमान का फ़ासला रह गया

  9. 9 فَكَانَ قَابَ قَوۡسَیۡنِ أَوۡ أَدۡنَىٰ

    फ़काना काबा कौसैनी औ अदना

    बल्कि इससे भी क़रीब था

  10. 10 فَأَوۡحَىٰۤ إِلَىٰ عَبۡدِهِۦ مَاۤ أَوۡحَىٰ

    फ़ौहिया इला मा औहा

    ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी

  11. 11 مَا كَذَبَ ٱلۡفُؤَادُ مَا رَأَىٰۤ

    कज़बा अल फुआदु रा'या

    तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना

  12. 12 أَفَتُمَـٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا یَرَىٰ

    अफा तुमारूनाहु अला यारा

    तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो

  13. 13 وَلَقَدۡ رَءَاهُ نَزۡلَةً أُخۡرَىٰ

    व-लक्द राहु नज़लतन उख़्रा

    और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है

  14. 14 عِندَ سِدۡرَةِ ٱلۡمُنتَهَىٰ

    एंदा सिद्राति अल-मुंतहा

    सिदरतुल मुनतहा के नज़दीक

  15. 15 عِندَهَا جَنَّةُ ٱلۡمَأۡوَىٰۤ

    इंदहा जन्नत

    उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है

  16. 16 إِذۡ یَغۡشَى ٱلسِّدۡرَةَ مَا یَغۡشَىٰ

    इज़् याशिया अस-सिद्रह यग्शा

    जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था

  17. 17 مَا زَاغَ ٱلۡبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ

    ज़ाग अल-बसरु वमा ताग़िया

    (उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी

  18. 18 لَقَدۡ رَأَىٰ مِنۡ ءَایَـٰتِ رَبِّهِ ٱلۡكُبۡرَىٰۤ

    लकद आयात रब्बिहि

    और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं

  19. 19 أَفَرَءَیۡتُمُ ٱللَّـٰتَ وَٱلۡعُزَّىٰ

    अफ़राएतुम अल्लाहु वल उज़्ज़ा

    तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा

  20. 20 وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلۡأُخۡرَىٰۤ

    वमनवात अस-सालिसा अल उख़्रा

    (भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)

  21. 21 أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلۡأُنثَىٰ

    अलकुमु अज़-ज़करु वल्लाहु अल-उन्सा

    क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ

  22. 22 تِلۡكَ إِذࣰا قِسۡمَةࣱ ضِیزَىٰۤ

    तल्का इज़ा क़िस्मत ज़िज़िया

    ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है

  23. 23 إِنۡ هِیَ إِلَّاۤ أَسۡمَاۤءࣱ سَمَّیۡتُمُوهَاۤ أَنتُمۡ وَءَابَاۤؤُكُم مَّاۤ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلۡطَـٰنٍۚ إِن یَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهۡوَى ٱلۡأَنفُسُۖ وَلَقَدۡ جَاۤءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلۡهُدَىٰۤ

    हेया अस्मा सम्मयतेमुहा अंतुम वआबाऊकुम अंज़ल अल्लाह बेहा मिन सुल्तान इन यत्तबिऊन इल्ला अज़-ज़न्ना वमा तह्वा अल-अनफुसु व-लक्द जाआहुम मिन रब्बिहिमु अल्हुदा

    ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है

  24. 24 أَمۡ لِلۡإِنسَـٰنِ مَا تَمَنَّىٰ

    अम लिल इन्सान तमन्ना

    क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है

  25. 25 فَلِلَّهِ ٱلۡـَٔاخِرَةُ وَٱلۡأُولَىٰ

    फा लिल्लाहि आल-आख़िरत वल-उल्या

    आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं

  26. 26 ۞ وَكَم مِّن مَّلَكࣲ فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ لَا تُغۡنِی شَفَـٰعَتُهُمۡ شَیۡـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ أَن یَأۡذَنَ ٱللَّهُ لِمَن یَشَاۤءُ وَیَرۡضَىٰۤ

    वकम मिन मलक फ़े अस-समावा विश्वास ते तुग्नी शफ़ातुहुम शैअन इल्ला बादि अन यज़ना अल्लाह यशा वयरदा

    और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)

  27. 27 إِنَّ ٱلَّذِینَ لَا یُؤۡمِنُونَ بِٱلۡـَٔاخِرَةِ لَیُسَمُّونَ ٱلۡمَلَـٰۤىِٕكَةَ تَسۡمِیَةَ ٱلۡأُنثَىٰ

    इन्ना अल्लाज़ीना यूमीनून बिल आख़िरत लयुसम्मून अल-मलाइका तस्मिया अल-उन्सा

    जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं

  28. 28 وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٍۖ إِن یَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا یُغۡنِی مِنَ ٱلۡحَقِّ شَیۡـࣰٔا

    वमा बेहि इल्मिन इन यत्तबिऊन इल्ला वा इन्ना अज़-ज़न्ना युग्नी मिन अल-हक़्क़ी

    वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,

  29. 29 فَأَعۡرِضۡ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكۡرِنَا وَلَمۡ یُرِدۡ إِلَّا ٱلۡحَیَوٰةَ ٱلدُّنۡیَا

    फाइर अन मेन तवल्ला अन ज़िक्रिना वलम युरेद इल्ला अल-हयात दुनिया

    तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो

  30. 30 ذَ ٰ⁠لِكَ مَبۡلَغُهُم مِّنَ ٱلۡعِلۡمِۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِیلِهِۦ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِمَنِ ٱهۡتَدَىٰ

    ज़ा विश्वास लेका मब्लगुहुम मिन अल-इल्म इन्ना रब्बक हुव अ'लामु बिमन ज़ल्ला अन सबीलिहि वहुव अ'लामु बिमनि इहतादा

    उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है

  31. 31 وَلِلَّهِ مَا فِی ٱلسَّمَـٰوَ ٰ⁠تِ وَمَا فِی ٱلۡأَرۡضِ لِیَجۡزِیَ ٱلَّذِینَ أَسَـٰۤـُٔوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَیَجۡزِیَ ٱلَّذِینَ أَحۡسَنُوا۟ بِٱلۡحُسۡنَى

    वलिल्लाह फ़े अस-समावा विश्वास ते वमा फ़े अल-अर्द लेयज़िया अल्लाज़ीना असाऊ बिमा वयग़्ज़िया अल्लाज़ीना अह्सनु बिल्हुस्ना

    और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की हो उनको उनकी कारस्तानियों की सज़ा दे और जिन लोगों ने नेकी की है (उनकी नेकी की जज़ा दे)

  32. 32 ٱلَّذِینَ یَجۡتَنِبُونَ كَبَـٰۤىِٕرَ ٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡفَوَ ٰ⁠حِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَۚ إِنَّ رَبَّكَ وَ ٰ⁠سِعُ ٱلۡمَغۡفِرَةِۚ هُوَ أَعۡلَمُ بِكُمۡ إِذۡ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ وَإِذۡ أَنتُمۡ أَجِنَّةࣱ فِی بُطُونِ أُمَّهَـٰتِكُمۡۖ فَلَا تُزَكُّوۤا۟ أَنفُسَكُمۡۖ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰۤ

    अल्लाज़ीना यज्तनिबून कबाइर अल-इथ्मि वल-फवा विश्वास हेशा इल्ला अल्लामामा इन्ना रब्बक और विश्वास सएउ हुव अ'लामु बेकुम इज़् मिन अल-अर्द वा इज़ अंतुम अजिन्ना फ़े बुतूनी उम्माहातिकुम फ़ला तुज़क्कुआ हुव अ'लामु बिमनि इत्तका

    जो सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों से और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ी बख्यिश वाला है वही तुमको ख़ूब जानता है जब उसने तुमको मिटटी से पैदा किया और जब तुम अपनी माँ के पेट में बच्चे थे तो (तकब्बुर) से अपने नफ्स की पाकीज़गी न जताया करो जो परहेज़गार है उसको वह ख़ूब जानता है

  33. 33 أَفَرَءَیۡتَ ٱلَّذِی تَوَلَّىٰ

    अफ़रायता अल्लाज़ी तवल्ला

    भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की

  34. 34 وَأَعۡطَىٰ قَلِیلࣰا وَأَكۡدَىٰۤ

    वा अता कलीलान वा अक्दा

    और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया

  35. 35 أَعِندَهُۥ عِلۡمُ ٱلۡغَیۡبِ فَهُوَ یَرَىٰۤ

    अ इंदहु इल्मु अल-ग़ैबि फहुवा

    क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है

  36. 36 أَمۡ لَمۡ یُنَبَّأۡ بِمَا فِی صُحُفِ مُوسَىٰ

    अम लम युनब्बा बिमा फ़े सुहुफि

    क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है

  37. 37 وَإِبۡرَ ٰ⁠هِیمَ ٱلَّذِی وَفَّىٰۤ

    इब्राहीम विश्वास हेइम अल्लाज़ी वफ़्फा

    और इबराहीम के (सहीफ़ों में)

  38. 38 أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةࣱ وِزۡرَ أُخۡرَىٰ

    अल्ला तज़िरु वज़ीरा वेज़रा उख़्रा

    जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा

  39. 39 وَأَن لَّیۡسَ لِلۡإِنسَـٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ

    वा अन लैस लिल इन्सान इल्ला सा'या

    और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है

  40. 40 وَأَنَّ سَعۡیَهُۥ سَوۡفَ یُرَىٰ

    वा-अन्ना सअयहु सौफ़ युरा

    और ये कि उनकी कोशिश अनक़रीेब ही (क़यामत में) देखी जाएगी

  41. 41 ثُمَّ یُجۡزَىٰهُ ٱلۡجَزَاۤءَ ٱلۡأَوۡفَىٰ

    सुम्म युज्ज़ाहु अल-जज़ा अल औफा

    फिर उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा

  42. 42 وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلۡمُنتَهَىٰ

    वा-अन्ना इला रब्बिक अल-मुंतहा

    और ये कि (सबको आख़िर) तुम्हारे परवरदिगार ही के पास पहुँचना है

  43. 43 وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضۡحَكَ وَأَبۡكَىٰ

    वा अन्नहु हुव अज़्हक वा अबक्या

    और ये कि वही हँसाता और रूलाता है

  44. 44 وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحۡیَا

    वा अन्नहु हुव अमात वा हिया

    और ये कि वही मारता और जिलाता है

  45. 45 وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوۡجَیۡنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰ

    वा अन्नहु ख़लक़ अल-ज़ौजैन अल-ज़करा

    और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है

  46. 46 مِن نُّطۡفَةٍ إِذَا تُمۡنَىٰ

    मिन नुत्फा इज़ा तुमनिया

    पैदा करता है

  47. 47 وَأَنَّ عَلَیۡهِ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُخۡرَىٰ

    वा-अन्ना अलय्हि अन-नशअत

    और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है

  48. 48 وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغۡنَىٰ وَأَقۡنَىٰ

    वा अन्नहु हुव अग़्ना वा अक्ना

    और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है,

  49. 49 وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعۡرَىٰ

    वा अन्नहु हुव रब्बु अश-शिअरा

    और ये कि वही योअराए का मालिक है

  50. 50 وَأَنَّهُۥۤ أَهۡلَكَ عَادًا ٱلۡأُولَىٰ

    अह्लक अदान अल-उला

    और ये कि उसी ने पहले (क़ौमे) आद को हलाक किया

  51. 51 وَثَمُودَا۟ فَمَاۤ أَبۡقَىٰ

    वासमुदा अबका

    और समूद को भी ग़रज़ किसी को बाक़ी न छोड़ा

  52. 52 وَقَوۡمَ نُوحࣲ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُوا۟ هُمۡ أَظۡلَمَ وَأَطۡغَىٰ

    वक़ौम मिन इन्नाहुम कानू हुम अज़्लम वा अतग़ा

    और (उसके) पहले नूह की क़ौम को बेशक ये लोग बड़े ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे

  53. 53 وَٱلۡمُؤۡتَفِكَةَ أَهۡوَىٰ

    वल्मुत्फिकह अहवा

    और उसी ने (क़ौमे लूत की) उलटी हुई बस्तियों को दे पटका

  54. 54 فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ

    फ़ग़श्शाहा ग़श्शा

    (फिर उन पर) जो छाया सो छाया

  55. 55 فَبِأَیِّ ءَالَاۤءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ

    फ़बैय्यि अलाइ रब्बिक तातमारिया

    तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा

  56. 56 هَـٰذَا نَذِیرࣱ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلۡأُولَىٰۤ

    हाज़ा नज़ीर मिन अन-नुज़ुर

    ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है

  57. 57 أَزِفَتِ ٱلۡـَٔازِفَةُ

    अज़िफ़त अल-आज़िफा

    कयामत क़रीब आ गयी

  58. 58 لَیۡسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ

    लैस लहा मिन दूने अल्लाह काशिफ़ातुन

    ख़ुदा के सिवा उसे कोई टाल नहीं सकता

  59. 59 أَفَمِنۡ هَـٰذَا ٱلۡحَدِیثِ تَعۡجَبُونَ

    अफ़ामिन हाज़ा ता'जबून

    तो क्या तुम लोग इस बात से ताज्जुब करते हो और हँसते हो

  60. 60 وَتَضۡحَكُونَ وَلَا تَبۡكُونَ

    वता-द्हकून तब्कौन

    और रोते नहीं हो

  61. 61 وَأَنتُمۡ سَـٰمِدُونَ

    और तुम सामीदून

    और तुम इस क़दर ग़ाफ़िल हो तो ख़ुदा के आगे सजदे किया करो

  62. 62 فَٱسۡجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعۡبُدُوا۟ ۩

    फसजुदु लिल्लाहिह वअबुदु

    और (उसी की) इबादत किया करो (62) सजदा

This surah in other languages