Goddestination

Nooh

नूह

नूह

28 ayahsMeccanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 إِنَّاۤ أَرۡسَلۡنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوۡمِهِۦۤ أَنۡ أَنذِرۡ قَوۡمَكَ مِن قَبۡلِ أَن یَأۡتِیَهُمۡ عَذَابٌ أَلِیمࣱ

    इन्ना नूह इला कौमिहि अंज़िर कौमक मिन क़ब्लि अन यातियहुम अज़ाब अलीम

    हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ

  2. 2 قَالَ یَـٰقَوۡمِ إِنِّی لَكُمۡ نَذِیرࣱ مُّبِینٌ

    क़ाला या क़ौमि इन्नी लकुम नज़ीर मुबीन

    तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ

  3. 3 أَنِ ٱعۡبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱتَّقُوهُ وَأَطِیعُونِ

    अनी इबुदु अल्लाह वत्तक़ूहु वा ती उनी

    कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो

  4. 4 یَغۡفِرۡ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمۡ وَیُؤَخِّرۡكُمۡ إِلَىٰۤ أَجَلࣲ مُّسَمًّىۚ إِنَّ أَجَلَ ٱللَّهِ إِذَا جَاۤءَ لَا یُؤَخَّرُۚ لَوۡ كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

    यग़फ़िर मिन ज़ुनुबिकुम वा युअख़्खिरकुम अजल मुसम्मा इन्ना अजला अल्लाह इज़ा जा यूअख़्खरु लौ तअलमून

    ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते

  5. 5 قَالَ رَبِّ إِنِّی دَعَوۡتُ قَوۡمِی لَیۡلࣰا وَنَهَارࣰا

    क़ाला रब्बी इन्नी दऔत क़ौमी लैलन वनहारा

    (जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा

  6. 6 فَلَمۡ یَزِدۡهُمۡ دُعَاۤءِیۤ إِلَّا فِرَارࣰا

    फ़लम यज़िदहुम दुआ-ई इल्ला फ़िरारन

    लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे

  7. 7 وَإِنِّی كُلَّمَا دَعَوۡتُهُمۡ لِتَغۡفِرَ لَهُمۡ جَعَلُوۤا۟ أَصَـٰبِعَهُمۡ فِیۤ ءَاذَانِهِمۡ وَٱسۡتَغۡشَوۡا۟ ثِیَابَهُمۡ وَأَصَرُّوا۟ وَٱسۡتَكۡبَرُوا۟ ٱسۡتِكۡبَارࣰا

    वा इन्नी कुल्लामा दाअव्तुहुम लेत्ग़-फ़िर लाहुम जाअलुआ असाइबेहुम अज़ानिहिम वस्तग्शौ सियाबहुम वा असर्रू वस्तकबरू इस्तिक्बारान

    और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे

  8. 8 ثُمَّ إِنِّی دَعَوۡتُهُمۡ جِهَارࣰا

    सुम्म इन्नी दाअव्तुहुम जेहार

    फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया

  9. 9 ثُمَّ إِنِّیۤ أَعۡلَنتُ لَهُمۡ وَأَسۡرَرۡتُ لَهُمۡ إِسۡرَارࣰا

    सुम्म अ'लंतु लाहुम वा असररतु लाहुम इसरारन

    और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा

  10. 10 فَقُلۡتُ ٱسۡتَغۡفِرُوا۟ رَبَّكُمۡ إِنَّهُۥ كَانَ غَفَّارࣰا

    फ़कुल्त इस्तग़फिरु रब्बुकुम इन्नाहु काना ग़फ़्फ़ारन

    अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है

  11. 11 یُرۡسِلِ ٱلسَّمَاۤءَ عَلَیۡكُم مِّدۡرَارࣰا

    युर्सिल अस-समाअ मिदरारन

    (और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा

  12. 12 وَیُمۡدِدۡكُم بِأَمۡوَ ٰ⁠لࣲ وَبَنِینَ وَیَجۡعَل لَّكُمۡ جَنَّـٰتࣲ وَیَجۡعَل لَّكُمۡ أَنۡهَـٰرࣰا

    वयुम्दिद्कुम बेअमुआ विश्वास लँ वबेनीना वय्ज़ल लाकुम वय्ज़ल लाकुम अनहार

    और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा

  13. 13 مَّا لَكُمۡ لَا تَرۡجُونَ لِلَّهِ وَقَارࣰا

    मा लकुम तर्जून लिल्लाहिह वक़ारन

    तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते

  14. 14 وَقَدۡ خَلَقَكُمۡ أَطۡوَارًا

    वक़िद ख़लककुम अतवारन

    हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया

  15. 15 أَلَمۡ تَرَوۡا۟ كَیۡفَ خَلَقَ ٱللَّهُ سَبۡعَ سَمَـٰوَ ٰ⁠تࣲ طِبَاقࣰا

    अलम तरुआ कैफ़ा ख़लक़ अल्लाह सबआ समाऊआ विश्वास ते तिबाकान

    क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए

  16. 16 وَجَعَلَ ٱلۡقَمَرَ فِیهِنَّ نُورࣰا وَجَعَلَ ٱلشَّمۡسَ سِرَاجࣰا

    वजाला अल-क़मर फ़ेहिन्न नूरन वजाला अश-शम्स सिराजन

    और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया

  17. 17 وَٱللَّهُ أَنۢبَتَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ نَبَاتࣰا

    वल्लाहु अन्बतकुम मिन अल-अर्द नबातन

    और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया

  18. 18 ثُمَّ یُعِیدُكُمۡ فِیهَا وَیُخۡرِجُكُمۡ إِخۡرَاجࣰا

    सुम्म युइदुकुम फ़िहा वयुख्रिकुम इख़राजन

    फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा

  19. 19 وَٱللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ بِسَاطࣰا

    वल्लाहु जाला लकुमु अल-अर्द बेसातन

    और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया

  20. 20 لِّتَسۡلُكُوا۟ مِنۡهَا سُبُلࣰا فِجَاجࣰا

    लीतेस्लूकूवा मिन्हा सुबुलन फ़ेजाजा

    ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो

  21. 21 قَالَ نُوحࣱ رَّبِّ إِنَّهُمۡ عَصَوۡنِی وَٱتَّبَعُوا۟ مَن لَّمۡ یَزِدۡهُ مَالُهُۥ وَوَلَدُهُۥۤ إِلَّا خَسَارࣰا

    क़ाला नूह रब्बी इन्नाहुम असौनी वत्ताबाउ मैन लम यज़्दुहु मालुहु ववल्लदुहु इल्ला ख़सारन

    (फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया

  22. 22 وَمَكَرُوا۟ مَكۡرࣰا كُبَّارࣰا

    व-मक-रू मक्रन कुब्बारन

    और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की

  23. 23 وَقَالُوا۟ لَا تَذَرُنَّ ءَالِهَتَكُمۡ وَلَا تَذَرُنَّ وَدࣰّا وَلَا سُوَاعࣰا وَلَا یَغُوثَ وَیَعُوقَ وَنَسۡرࣰا

    व क़ालू तज़ुरुन्ना अलिहतकुम तज़ुरुन्ना वद्दा सुवाऽन यगूसा वयाउक़ वनस्रा

    और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना

  24. 24 وَقَدۡ أَضَلُّوا۟ كَثِیرࣰاۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِینَ إِلَّا ضَلَـٰلࣰا

    वक़िद अदल्लू कसीरान ताज़ेद अज़-ज़़ालिमीन इल्ला ज़लाल

    और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे

  25. 25 مِّمَّا خَطِیۤـَٔـٰتِهِمۡ أُغۡرِقُوا۟ فَأُدۡخِلُوا۟ نَارࣰا فَلَمۡ یَجِدُوا۟ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ أَنصَارࣰا

    मिम्मा ख़ातियातिहिम उग़्रिकू फुज़्हिलु नारा फ़लम यजदुआ मिन दूने अल्लाह अंसार

    (आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया

  26. 26 وَقَالَ نُوحࣱ رَّبِّ لَا تَذَرۡ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ مِنَ ٱلۡكَـٰفِرِینَ دَیَّارًا

    व काला नूह रब्बी तज़ार अलै अल-अर्द मिन अल-काफिरीन दैय्याराँ

    और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे

  27. 27 إِنَّكَ إِن تَذَرۡهُمۡ یُضِلُّوا۟ عِبَادَكَ وَلَا یَلِدُوۤا۟ إِلَّا فَاجِرࣰا كَفَّارࣰا

    इन्नका इन ताज़रहुम युज़िल्लु इबादक येलेदुआ इल्ला फ़ाजिर कफ़्फ़ारन

    क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी

  28. 28 رَّبِّ ٱغۡفِرۡ لِی وَلِوَ ٰ⁠لِدَیَّ وَلِمَن دَخَلَ بَیۡتِیَ مُؤۡمِنࣰا وَلِلۡمُؤۡمِنِینَ وَٱلۡمُؤۡمِنَـٰتِۖ وَلَا تَزِدِ ٱلظَّـٰلِمِینَ إِلَّا تَبَارَۢا

    रब्बी इग़फ़िर लेइ वेल्वे विश्वास लेदय्य वलेमन दख़ल बैतिया मुअ्मिनन् वलिल्मु'मिनीन ताज़ेद अज़-ज़़ालिमीन इल्ला तबारा

    परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर

This surah in other languages