Goddestination

Al-Fajr

अल-फज्र

भोर

30 ayahsMeccanहिन्दी

Now playing Watch on YouTube

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِیمِ

बिस्मि अल्लाह अर-रहमान अर-रहीम

  1. 1 وَٱلۡفَجۡرِ

    वल-फज-री

    सुबह की क़सम

  2. 2 وَلَیَالٍ عَشۡرࣲ

    वलयालिन अश्र

    और दस रातों की

  3. 3 وَٱلشَّفۡعِ وَٱلۡوَتۡرِ

    वश-शफ़ी वलवतरी

    और ज़ुफ्त व ताक़ की

  4. 4 وَٱلَّیۡلِ إِذَا یَسۡرِ

    वल्लैली इज़ा यास्रि

    और रात की जब आने लगे

  5. 5 هَلۡ فِی ذَ ٰ⁠لِكَ قَسَمࣱ لِّذِی حِجۡرٍ

    हल फ़े ज़ा विश्वास लेका क़सम लिज़ी हिज्र

    अक्लमन्द के वास्ते तो ज़रूर बड़ी क़सम है (कि कुफ्फ़ार पर ज़रूर अज़ाब होगा)

  6. 6 أَلَمۡ تَرَ كَیۡفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ

    अलम तारा कैफ़ा फ़ाला रब्बुक बिआद

    क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया

  7. 7 إِرَمَ ذَاتِ ٱلۡعِمَادِ

    इरम ज़ात अल-इमाद

    यानि इरम वाले दराज़ क़द

  8. 8 ٱلَّتِی لَمۡ یُخۡلَقۡ مِثۡلُهَا فِی ٱلۡبِلَـٰدِ

    अल-लाती लम युख़्लक़ मिस्लुहा फ़े अल-बिलाद

    जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया

  9. 9 وَثَمُودَ ٱلَّذِینَ جَابُوا۟ ٱلصَّخۡرَ بِٱلۡوَادِ

    थमूद अल्लाज़ीना जाबू अस-सख़रा बिल-वादी

    और समूद के साथ (क्या किया) जो वादी (क़रा) में पत्थर तराश कर घर बनाते थे

  10. 10 وَفِرۡعَوۡنَ ذِی ٱلۡأَوۡتَادِ

    फ़िरऔन ज़ी अल औताद

    और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था

  11. 11 ٱلَّذِینَ طَغَوۡا۟ فِی ٱلۡبِلَـٰدِ

    अल्लाज़ीना तगौ फ़े अल-बिलाद

    ये लोग मुख़तलिफ़ शहरों में सरकश हो रहे थे

  12. 12 فَأَكۡثَرُوا۟ فِیهَا ٱلۡفَسَادَ

    फाअसरु फ़िहा अल-फ़साद

    और उनमें बहुत से फ़साद फैला रखे थे

  13. 13 فَصَبَّ عَلَیۡهِمۡ رَبُّكَ سَوۡطَ عَذَابٍ

    फ़सब्ब अलैहिम रब्बुक सौत अज़ाबिन

    तो तुम्हारे परवरदिगार ने उन पर अज़ाब का कोड़ा लगाया

  14. 14 إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلۡمِرۡصَادِ

    इन्ना रब्बक लबिल मिर्सादी

    बेशक तुम्हारा परवरदिगार ताक में है

  15. 15 فَأَمَّا ٱلۡإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبۡتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكۡرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَیَقُولُ رَبِّیۤ أَكۡرَمَنِ

    फ़ाम्मा अल-इन्सान इज़ा इब्तालायुहु रब्बुहु फ़ाअक्रमाहु वा नआमहु फ़याक़ुलु रब्बी अक्रामनि

    लेकिन इन्सान जब उसको उसका परवरदिगार (इस तरह) आज़माता है कि उसको इज्ज़त व नेअमत देता है, तो कहता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे इज्ज़त दी है

  16. 16 وَأَمَّاۤ إِذَا مَا ٱبۡتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَیۡهِ رِزۡقَهُۥ فَیَقُولُ رَبِّیۤ أَهَـٰنَنِ

    इज़ा इब्तालायुहु फ़कदर अलय्हि रिज़्कुहु फ़याक़ुलु रब्बी अहानेनि

    मगर जब उसको (इस तरह) आज़माता है कि उस पर रोज़ी को तंग कर देता है बोल उठता है कि मेरे परवरदिगार ने मुझे ज़लील किया

  17. 17 كَلَّاۖ بَل لَّا تُكۡرِمُونَ ٱلۡیَتِیمَ

    कल्ला बल ला तुक्रिमून अल-यतीम

    हरगिज़ नहीं बल्कि तुम लोग न यतीम की ख़ातिरदारी करते हो

  18. 18 وَلَا تَحَـٰۤضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلۡمِسۡكِینِ

    तहाद्दुन अला तामिम अल-मिस्कीन

    और न मोहताज को खाना खिलाने की तरग़ीब देते हो

  19. 19 وَتَأۡكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكۡلࣰا لَّمࣰّا

    वता-कुलून अत-तुरासा अक्लान लम्मा

    और मीरारा के माल (हलाल व हराम) को समेट कर चख जाते हो

  20. 20 وَتُحِبُّونَ ٱلۡمَالَ حُبࣰّا جَمࣰّا

    वा तुहिब्बुना अल-माल हुब्बन जम

    और माल को बहुत ही अज़ीज़ रखते हो

  21. 21 كَلَّاۤۖ إِذَا دُكَّتِ ٱلۡأَرۡضُ دَكࣰّا دَكࣰّا

    इज़ा डोक्टे अल-अर्द दक्का दक्का

    सुन रखो कि जब ज़मीन कूट कूट कर रेज़ा रेज़ा कर दी जाएगी

  22. 22 وَجَاۤءَ رَبُّكَ وَٱلۡمَلَكُ صَفࣰّا صَفࣰّا

    वजा रब्बुक वल मलकु सफ़्फ़न सफ़्फ़न

    और तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म और फ़रिश्ते कतार के कतार आ जाएँगे

  23. 23 وَجِا۟یۤءَ یَوۡمَىِٕذِۭ بِجَهَنَّمَۚ یَوۡمَىِٕذࣲ یَتَذَكَّرُ ٱلۡإِنسَـٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكۡرَىٰ

    वेज़ाया यौमिज़ि बिजहन्नम यौमाइज़ि यताज़क्करु अल-इन्सान वा अना लहु अज़-ज़िक्रा

    और उस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी उस दिन इन्सान चौंकेगा मगर अब चौंकना कहाँ (फ़ायदा देगा)

  24. 24 یَقُولُ یَـٰلَیۡتَنِی قَدَّمۡتُ لِحَیَاتِی

    यकूलु यलयेतनी क़दमतु लेहयाती

    (उस वक्त) क़हेगा कि काश मैने अपनी (इस) ज़िन्दगी के वास्ते कुछ पहले भेजा होता

  25. 25 فَیَوۡمَىِٕذࣲ لَّا یُعَذِّبُ عَذَابَهُۥۤ أَحَدࣱ

    फ़यौमिज़ ला युअज़्ज़िबु अज़ाबाहु अहद

    तो उस दिन ख़ुदा ऐसा अज़ाब करेगा कि किसी ने वैसा अज़ाब न किया होगा

  26. 26 وَلَا یُوثِقُ وَثَاقَهُۥۤ أَحَدࣱ

    यूथिकु वसाका अहद

    और न कोई उसके जकड़ने की तरह जकड़ेगा

  27. 27 یَـٰۤأَیَّتُهَا ٱلنَّفۡسُ ٱلۡمُطۡمَىِٕنَّةُ

    या अय्यतुहा अन-नफ़्सु अल-मुतमैन्नाह

    (और कुछ लोगों से कहेगा) ऐ इत्मेनान पाने वाली जान

  28. 28 ٱرۡجِعِیۤ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِیَةࣰ مَّرۡضِیَّةࣰ

    अर्जिई इला रब्बिक राज़िया मार्दिय्याह

    अपने परवरदिगार की तरफ़ चल तू उससे ख़ुश वह तुझ से राज़ी

  29. 29 فَٱدۡخُلِی فِی عِبَـٰدِی

    फ़ाज़खुली फ़े इबादी

    तो मेरे (ख़ास) बन्दों में शामिल हो जा

  30. 30 وَٱدۡخُلِی جَنَّتِی

    वाद्खुली जन्नती

    और मेरे बेहिश्त में दाख़िल हो जा

This surah in other languages